हिमाचल में बलि का त्योहार 'बुद्धि दीपावली' रविवार से
शिमला, 4 दिसम्बर (आईएएनएस)। देश के बाकी हिस्सों में जहां एक महीने पहले ही प्रकाश पर्व दीपावली मनाया जा चुका है वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में एक प्रकार की अनोखी दीपावली 'बुद्धि दीपावली' मनाने की तैयारी है। इस दीपावली पर उजियारा बिखेरने के लिए दीप सजाने की जगह पशुओं की बलि दी जाएगी।
हिमाचल की इस चार दिवसीय दीपावली की शुरुआत रविवार को अमावस्या के दिन से होगी। त्योहार के दौरान लोग ढोल-बाजे और मंत्रों के साथ पशुओं की बलि देंगे। इस दीपावली को स्थानीय लोग 'बुद्धि दीपावली' कहते हैं। इस दौरान आमोद-प्रमोद के माहौल में महाभारत महाकाव्य से जुड़े लोकगीत गाए जाते हैं।
यह पर्व मुख्य रूप से कुल्लू जिले के एनी और निर्मंद, सिरमौर जिले के शिल्लई और शिमला जिले के चोपाल में मनाया जाता है। यह पशु बलि के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है।
इस लोक पर्व को महाभारत की लड़ाई से जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि 'बुद्धि दीपावली' के दिन से महाभारत युद्ध आरम्भ हुआ था। कुछ विद्वानों का मानना है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर इस इलाके में देर से पहुंची थी, इसलिए यहां देर से दीपावली मनाई जाती है।
कुल्लू जिले में दानवों और राक्षसों के पुतलों को नष्ट करके इस पर्व को मनाया है। माना जाता है कि दानव और राक्षस सांपों के रूप में यहां रहते थे।
इस दौरान सैकड़ों बकरियों, भेड़ों और भैंसों की बलि दी जाती है। शिल्लई इलाके की बुजुर्ग ग्रामीण सुधा रानी कहती है कि, "हम इस खास त्योहार के लिए सालभर भेंड़-बकरियां पालते हैं। बलि दी जाती है तो हमें भी बुरा लगता है लेकिन इससे समृद्धि आती है और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा मिलती है।"
उनका कहना है कि स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर वर्षो पुरानी पशुओं की 'बलि' को रोक दिया गया तो, ग्रामीणों को दैवीय आपदाओं का समाना करना पड़ेगा।
वैसे राज्य के भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक प्रेम शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि पशु बलि में कमी आ रही है।
उन्होंने कहा, "हम लोगों को बलि देने की जगह नारियल फोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कुछ इलाकों में पशु बलि में कमी आई है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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