युद्ध अपराध वीडियो को श्रीलंका ने फर्जी करार दिया (लीड-2)
इस वीडियो का प्रसारण मंगलवार को हुआ था जिसमें श्रीलंका में 26 साल से चल रहे गृहयुद्ध के कुछ अंतिम सप्ताहों में सैनिकों को नागरिकों को फांसी देते दिखाया गया। पिछले साल तमिल विद्रोही समूह लिट्टे पर श्रीलंकाई सरकार की विजय की घोषणा के बाद यह युद्ध समाप्त हो गया था।
दिल्ली में श्रीलंकाई उच्चायोग के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया,"लिट्टे ने पिछले साल एक वीडियो का जारी किया था। नया वीडियो उसी का एक लम्बा संस्करण है। हमने वीडियो की जांच की थी जो फर्जी पाई गई थी।"
अधिकारी ने बताया, "वीडियो में कई खामियां पाई गई थीं। लिट्टे ने दुष्प्रचार करने के लिए यह सब किया।"
वीडियो में एक सैनिक को आंखों पर पट्टी बांधे कैदियों में से एक के पैर में गोली मारते दिखाया गया, बाद में यह कैदी जमीन पर पड़े अन्य तमिल कैदियों के ऊपर गिर जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष दूत ने वीडियो के जांच की मांग की है।
श्रीलंकाई सैनिकों द्वारा नागरिकों को मनमानी सजा दिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत क्रिस्टोफ हेन्स का कहना है, "यह वास्तव में चौंकाने वाला है और साफ तौर पर इस मामले में छानबीन की जानी चाहिए।"
वैसे संयुक्त राष्ट्र ने 16 महीने पहले ही यह मामला सामने आने के बाद इसकी जांच शुरू कर दी थी। चैनल 4 न्यूज ने इसका नया वीडियो श्रीलंका में युद्ध अपराध के आरोपों की जांच कर रही संयुक्त राष्ट्र समिति को भेजा है।
इस बीच ब्रिटेन में श्रीलंकाई उच्चायोग ने कहा है कि चैनल 4 न्यूज द्वारा प्रसारित किया गया वीडियो प्रामाणिक नहीं है।
उच्चायोग ने जारी एक बयान में कहा है कि, "पिछले साल जब चैनल 4 न्यूज ने ऐसा ही एक वीडियो जारी किया था तो श्रीलंकाई सरकार ने वीडियो की प्रमाणिकता को फर्जी बताया था।"
बयान के अनुसार चैनल 4 न्यूज ने पिछले साल इसी तरह का एक वीडियो जारी किया था। श्रीलंकाई सरकार ने साफ कर दिया था कि यह वीडियो फर्जी है। फिलहाल आई नई वीडियो उसी का एक लम्बे संस्करण के अलाव कुछ नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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