देश के प्रथम राष्ट्रपति को शिक्षा देने वाला विद्यालय बदहाल
पटना, 3 दिसंबर (आईएएनएस)। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने देश की नींव मजबूत करने में बहुमूल्य योगदान दिया था, लेकिन खुद राजेन्द्र प्रसाद की नींव मजबूत करने वाला विद्यालय आज बदतर हालत में है। यही नहीं विद्यालय परिसर में कई दूसरे संस्थानों के कार्यालय होने की वजह से पढ़ाई का माहौल खराब हो रहा है।
देश की अमूल्य धरोहर घोषित की जाने लायक इस विद्यालय की दीवारें आज जर्जर हो चुकी हैं। इस विद्यालय के छात्र और शिक्षक हालांकि आज भी इस विद्यालय से जुड़कर गौरवान्वित महसूस करते हैं।
तीन दिसंबर 1884 में बिहार के सीवान जिले (तत्कालीन छपरा जिला) के जीरादेई में जन्मे राजेन्द्र प्रसाद ने छपरा जिला स्कूल से औपचारिक पढ़ाई की शुरुआत की थी और यहीं से वर्ष 1902 में उन्होंने इंटरेंस की परीक्षा भी पास की थी।
करीब 22 एकड़ में फैले इस जिला स्कूल की स्थापना वर्ष 1854 में हुई थी। वर्तमान समय में इस विद्यालय में नौवीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होती है। वर्तमान समय में इस विद्यालय में नौवीं कक्षा में 144, दसवीं में 171, 11वीं में 103 तथा 12वीं में 22 छात्र पढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि कभी इस विद्यालय में छात्रों की संख्या एक हजार से ज्यादा होती थी।
विद्यालय के मौजूदा प्रभारी प्राचार्य गोपाल सिन्हा बताते हैं कि इंटरेंस परीक्षा में एक परीक्षक ने राजेंद्र बाबू की उत्तर पुस्तिका पर लिखा था कि 'परीक्षक से परीक्षार्थी ज्यादा तेज है'। उन्होंने बताया कि आज भी वह उत्तर पुस्तिका कोलकता के संग्रहालय में देखी जा सकती है।
उन्होंने बताया कि राजेन्द्र प्रसाद के बड़े भाई महेन्द्र प्रसाद छपरा में ही वकालत किया करते थे। इसलिए वे भी यहीं पढ़ने चले आये थे। वे बताते हैं कि राजेन्द्र प्रसाद ने यहां से इंटरेंस तक की पढ़ाई की थी हालांकि बीच में कुछ समय के लिये वे पी़ क़े घोष एकेडमी, पटना भी चले गये थे। हालांकि बाद में वे फिर यहां लौट आये थे। वे कहते हैं कि पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
इधर, विद्यालय के एक शिक्षक वसंत गुप्ता ने कहा कि इस विद्यालय में वर्तमान समय में 28 शिक्षकों की जगह है, परंतु मात्र आठ शिक्षक ही कार्यरत हैं। दो वर्ष पहले इस विद्यालय को आदर्श विद्यालय का दर्जा दिया गया था।
उन्होंने बताया कि इस बात का जरूर फक्र होता है कि मैं उस विद्यालय का शिक्षक हूं जिसमें डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने शिक्षा ग्रहण की थी।
इस विद्यालय भवन में आज जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यलय, शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, राजकीय उच्च विद्यालय (नवस्थापित) चल रहे हैं। इस कारण जिला स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को पढ़ाई का वातावरण ही नहीं मिल पा रहा है।
इधर, जिला शिक्षा पदाधिकारी सेलेस्टिन हांसदा का कहना है कि भवन के अभाव में इन कार्यालयों शिक्षण संस्थाओं को यहां चलाया जा रहा है। वे मानते हैं कि पुराने भवन की स्थिति जर्जर हो गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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