सिकुड़ रहा है अंटार्कटिक ओजोन परत का छिद्र
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक वैज्ञानिक स्टीफन वुड कहते हैं कि इससे इस बात के संकेत मिलते हैं कि इस दिशा में किए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रयास कारगर सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वातावरण में क्लोरोफ्लोकार्बन का उत्सर्जन कम करने व ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य तत्वों को दूर करने की 1987 की मोंट्रियल संधि काम कर रही है।
वुड ने कहा कि जमीनी और उपग्रह गणनाएं बताती हैं कि अंटार्कटिक का ओजोन छिद्र 2.2 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक बड़ा हो गया था और इस साल ओजोन परत के द्रव्यमान में लगभग 2.7 करोड़ टन की कमी आई है।
पिछले साल ओजोन छिद्र 2.4 करोड़ वर्ग किलोमीटर बड़ा था और ओजोन परत के द्रव्यमान में 3.5 करोड़ टन की कमी आई थी। अब तक का सबसे बड़ा ओजोन छिद्र 2000 में हुआ था। उस समय इसका आकार 2.9 करोड़ वर्ग किलोमीटर था और द्रव्यमान में 4.3 करोड़ टन की कमी दर्ज की गई थी।
वैसे वुड यह कहने में हिचकिचाते हैं कि ओजोन छिद्र पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। वह कहते हैं कि कुछ साल के दौरान छिद्रों के आकार में कमी आने से ओजोन परत के ठीक होने के संकेत मिलते हैं।
अंटार्कटिक में ओजोन छिद्र हर साल अगस्त और सितम्बर में बनता है और यह नवंबर या दिसम्बर तक रहता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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