मप्र में 3 अफसरों को सजा
लोकायुक्त पुलिस भोपाल ने जांच में पाया था कि तत्कालीन प्रबंध संचालक वी. के. जाजौरिया, तत्कालीन संचालक एम.पी. देशपांडे, तत्कालीन उप महा प्रबंधक भारत सिंह सिकरवार और तत्कालीन लेखापाल कैलाश चंद्र श्रीवास्तव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए हितग्राहियों को शिक्षण देने के नाम पर प्रतिष्ठा योजना के अंतर्गत निम्न स्तर की अनुपयुक्त सामग्री का क्रय कर शासन के भण्डार एवं क्रय नियमों का उल्लंघन किया है। इस आपराधिक षडयंत्र से शासन को छह लाख रुपये की आर्थिक हानि हुई है। इस जांच के बाद जून 1999 में भोपाल न्यायालय में यह मामला पेश किया गया था।
तत्कालीन चार आरोपियों में से जाजौरिया की मृत्यु हो चुकी है, शेष तीन आरोपियों को भोपाल न्यायालय ने गुरुवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं पांच-पांच हजार रूपये की सजा सुनाई है। इसी तरह आपराधिक मामले में एक-एक वर्ष का कारावास व पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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