विकिलीक्स खुलासा : भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है अफगानिस्तान
वाशिंगटन, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। विकिलीक्स द्वारा लीक किए गए गोपनीय अमेरिकी कूटनीतिक संदेशों की नई खेप में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई को पागल करार दिया गया है और कहा गया है कि वह राज्य निर्माण के अति बुनियादी सिद्धांतों को भी समझ पाने में अक्षम हैं। इसके साथ ही खुलासे में अफगानिस्तान को भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ बताया गया है।
समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' ने लीक हुए संदेशों के हवाले से गुरुवार को खबर प्रकाशित की थी। खबर में लिखा था कि काबुल स्थित अमेरिकी दूतावास से पिछले दो वर्षो के दौरान भेजे गए संदेशों में भ्रष्टाचार की संक्रामक प्रकृति, उसका व्यापक स्तर चित्रित किया गया था और यह भी कि इस भ्रष्टाचार ने अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष भारी चुनौती खड़ी कर दी हैं।
अफगानिस्तान स्थित अमेरिकी दूतावास से इस साल के प्रारम्भ में प्राप्त हुए एक संदेश में कहा गया था कि कृषि मंत्री आसिफ रहीमी "एक मात्र ऐसे मंत्री लगते हैं, जिनके बारे में इस बात की पुष्टि हो गई थी कि उन पर रिश्वतखोरी का कोई आरोप नहीं था।"
एक संदेश में कहा गया है कि यहीं पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सईद फातिमी ने अमेरिकी राजनयिकों को बताया था कि उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने के लिए सांसद नकदी की मांग कर रहे थे। "फातिमी ने कहा था कि सांसदों ने अपना वोट देने के लिए और अन्य के वोट दिलाने के लिए प्रति वोट 1,000 डॉलर का प्रस्ताव रखा था।"
एक अन्य अफगान मंत्री ने अमेरिकी राजनयिकों को बताया था कि "करजई कई ऐसे लोगों को मंत्री बनाने के लिए राजनीतिक नेताओं के भारी दबाव में हैं, जो तकनीकी रूप से मंत्री बनने की योग्यता नहीं रखते।"
'न्यूयार्क टाइम्स' ने कहा है इन गोपनीय संदेशों में नाटो सहयोगियों और करजई के बीच असामान्य सम्बंधों की बात भी चित्रित है। एक संदेश में वर्णित अक्टूबर 2008 की एक बैठक में एक ब्रिटिश अधिकारी ने कहा था कि ब्रिटेन करजई को लेकर लगातार गहरी निराशा महसूस करता है। लेकिन उस अधिकारी ने बाद में कहा था, "मैं लोगों को याद दिलाता हूं कि हमने (अंतर्राष्ट्रीय समुदाय) ही उन्हें चुना।"
इसके कुछ माह बाद अमेरिकी राजदूत कार्ल एकेनबरी ने करजई का एक स्पष्ट मनोवैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया था। सात जुलाई, 2009 को भेजे एक संदेश में एकेनबरी ने लिखा था कि करजई की एक ऐसी छवि सामने आई है, "जो एक पागल और कमजोर व्यक्ति की है और वह राष्ट्र निर्माण के बुनियादी सिद्धांतों को भी नहीं जानते। वह इस बात को लेकर इतने आशंकित हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से उन्हें प्रशंसा मिलने का समय बीत चुका है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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