'पंजाब में बेघर हो जाते हैं दो गांवों के लोग'
कालेवाल (पंजाब), 2 दिसम्बर (आईएएनएस)। पंजाब के दो गांवों के लोग कुछ दिनों से एक अजीब दिनचर्या का पालन करते हैं। वे प्रत्येक सुबह अपने 2,500 मवेशियों को एक जगह करने के बाद दिन का समय गुरुद्वारे में या अस्थाई शिविरों में गुजारते हैं। ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि सेना युद्ध सामग्रियों को नष्ट कर सके।
सेना ने करीब 17,000 अज्ञात युद्ध सामग्रियों को नष्ट करने के लिए गत 10 नवंबर से मत्तीवाड़ा के वन क्षेत्र में ऑपरेशन श्याम की शुरुआत की है। सेना का दावा है कि युद्ध सामग्रियों को नष्ट करने का यह उसका सबसे बड़ा अभियान है।
सेना का यह अभियान लुधियाना जिले के सेखेवाला और कालेवाल ग्रामीणों के लिए मुसीबतें खड़ी कर रहा है। इन दोनों गांवों के लोग अपने मवेशियों को छोड़ सुबह 8.30 बजे तक अपना घर खाली कर देते हैं। ग्रामीण अपना दिन सतलज नदी के समीप शिविरों में गुजारने के बाद शाम 4.30 बजे घर लौटते हैं।
वहीं, सर्दी के मौसम की शुरुआत होने से ग्रामीणों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
केलावाल गांव की सरपंच गुरजीत कौर ने आईएएनएस को बताया, "युद्ध सामग्रियों को नष्ट करना आवश्यक है, इसके लिए हम प्रशासन से सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनका रवैया अव्यावहारिक है। सेना के लोग प्रत्येक सुबह करीब 6.30 बजे घरों को खाली करने के लिए कहते हैं।"
उधर, स्कूली छात्रों ने भी शिकायत की है कि इस अभियान से उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई है।
कक्षा 12वीं की छात्र परमीत कौर ने आईएएनएस को बताया, "रोजाना मैं अपना घर सुबह सात बजे छोड़ देती हूं और शाम 5.30 बजे तक लौटती हूं। मेरे पास पढ़ाई के लिए समय नहीं बचता है।"
वहीं, लुधियाना जिले के उपायुक्त राहुल तिवारी ने आईएएनएस को बताया, "हम इस बात की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि इस अभियान से ग्रामीणों को किसी तरह की परेशानी न हो। किसी अनहोनी से बचने के लिए ग्रामीणों को वहां से निकालना जरूरी है।"
सेना की बम निरोधक इकाई (बीडीआई) के लेफ्टिनेंट कर्नल विनोद भट्ट ने आईएएनएस को बताया, "हम ग्रामीणों की समस्याएं समझते हैं। अपना काम करने के लिए हमारी उन्हें सप्ताहिक अवकाश देने की योजना है। ग्रामीणों को 20 दिसम्बर के बाद घर खाली करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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