भोपाल गैस त्रासदी : दर्द इतना कि अब रोया भी न जाए

भोपाल, 2 दिसंबर (आईएएनएस)। चेहरे पर गहरे घाव, उनसे बहता मवाद और खाना न खा पाने के कारण नाक से डाली गई नली। इस मंजर को देखकर किसी की भी आंखों से आंसू छलक जाएं, मगर शहजाद खान ऐसे व्यक्ति है जिन्हें यह दर्द अपना लगने लगा है और अब उनसे रोया भी नहीं जाता।

भोपाल में यूनियन कार्बाइड संयंत्र के सामने बसी बस्ती जेपी नगर में रहने वाले 55 वर्षीय शहजाद गैस पीड़ितों का वह चेहरा हैं जो हादसे के 26 साल बाद भी जख्म पर जख्म सहे जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भारत सरकार उन्हें स्वस्थ्य मानती है और मंत्री समूह ने जिन लोगों को मुआवजे की अतिरिक्त राशि देने का निर्णय लिया है, उनमें शहजाद जैसे मरीज शामिल नही हैं।

गैस हादसे के वक्त शहजाद एक हट्टा कट्टा नौजवान हुआ करता था। उसने अपनी आंखों से हजारों लोगों की लाशें देखी हैं और हादसे में अपने करीबियों को भी खोया है। गैस का असर उस पर भी हुआ था मगर कम उम्र के कारण उस वक्त ज्यादा दिखा नहीं, लेकिन 26 साल बाद इसने ऐसा असर दिखाया है कि शहजाद को देखते ही रुह कांप जाती है।

शहजाद सब्जी का ठेला लगाकर अपना परिवार चलाया करता था मगर आठ माह पहले मुंह पर कैंसर ने ऐसा असर दिखाया कि अब पूरा चेहरा ही फोड़े फुंसी का अड्डा बन गया है। पिछले दो माह से वह मुंह से कुछ खा नहीं पा रहा है और उसे नली के जरिए तरल पदार्थ दिया जा रहा है।

शहजाद की पत्नी शहजादी बी का कहना है कि अब इलाज कराना मुश्किल हो गया है, क्योंकि आय का कोई जरिया ही नहीं है। उन्हें पूर्व में मुआवजे में 25 हजार मिले थे लेकिन मंत्री समूह ने अतिरिक्त मुआवजे के योग्य जिन लोगों को माना है उनमें शहजाद नहीं है।

शहजाद की ही तरह बाबू खां हैं जिनके पैर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और उनका अधिकांश वक्त बिस्तर पर ही गुजर रहा है। वे सरकार से नाउम्मीद हो चुके है और जिंदगी के अंतिम दिन गिन रहे हैं। यही हाल रशीदा बी का है जिनके एक हाथ ने काम करना बंद कर दिया है और पूरी तरह सुन्न हो गया है। वे बताती हैं कि जब गैस रिसी थी तभी डॉक्टरों ने कहा था कि इसका असर 25 से 30 वर्ष बाद दिखेगा और हाथ पांव काम करना बंद कर देंगे, अब उन्हें डॉक्टर की बात सच्ची लगने लगी है।

भोपाल गैस पीड़ित सहयोग संघर्ष समिति की साधना कार्णिक का कहना है कि मंत्री समूह के फैसले ने लगभग पांच लाख पीड़ितों को मुआवजे से वंचित कर दिया है। बीमारी के कारण हर रोज मौतें हो रही हैं मगर मंत्री समूह ने उन्हें स्वस्थ्य माना है। यह वर्गीकरण पूरी तरह अन्याय पूर्ण है और पीड़ितों के साथ अन्याय है। यह सब अमेरिकी कम्पनी को बचाने के लिए किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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