येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाने से भाजपा का इंकार (लीड-2)
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर द्वारा जारी किए गए एक बयान में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा, "पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और राज्य के नेताओं से मशविरा करने के बाद पार्टी ने येदियुरप्पा को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया है।"
ज्ञात हो कि येदियुरप्पा बेंगलुरू में और उसके आसपास के इलाकों में अपने रिश्तेदारों को कीमती भूखंडों को सस्ती दरों पर आवंटित करने के आरोपों का सामना कर रहे है और विपक्ष उन्हें पद से हटाए जाने की मांग कर रहा है।
गडकरी के इस बयान के पहले उनके और येदियुरप्पा के बीच मंगलवार देर रात दो घंटे बातचीत हुई थी। सोमवार से ही दिल्ली में डेरा जमाए येदियुरप्पा ने लालकृष्ण आडवाणी, अरूण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे पार्टी के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात की।
येदियुरप्पा के समर्थकों - कर्नाटक के भाजपा सांसद और उनके लिंगायत समुदाय से सम्बंधित नेता- ने भी भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और येदियुरप्पा को पद पर बनाए रखने के लिए वकालत की।
गडकरी ने कहा, "मुख्यमंत्री ने अपने विचार मुझे लिख कर भी दिए थे। चूंकि पंचायत और जिला परिषद चुनाव करीब हैं, लिहाजा पार्टी अपने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील करती है कि पार्टी की सफलता के लिए एकजुट होकर काम किया जाए।"
गडकरी ने यह भी कहा कि "राज्य सरकार भूमि आवंटन के आरोपों की जांच के लिए पहले ही एक आयोग का गठन कर चुकी है।"
येदियुरप्पा ने मंगलवार को कहा था, "मैंने पार्टी को खड़ा करने में कठिन परिश्रम किया है। पार्टी के फैसले को न मानने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।"
मुख्यमंत्री ने वर्ष 1995 से हुए भूमि आवंटन घोटालों की जांच कराने का आदेश दिया है, लेकिन विपक्षी जनता दल (सेक्युलर ) मुख्यमंत्री पर भूमि आवंटन के घोटाले का आरोप लगा रहा है। बेंगलुरू में जद (एस) ने कहा कि वह जांच का बहिष्कार करेगी।
उल्लेखनीय है कि येदियुरप्पा ने सोमवार को घोषणा की कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. पद्मराज बेंगलुरू विकास प्राधिकरण द्वारा वर्ष 1995 से अब तक किए गए रिहायशी प्लॉटों के आवंटन की जांच करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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