संसद में गतिरोध बरकरार, कांग्रेस का जेपीसी से इंकार (राउंडअप)
नई दिल्ली, 23 नवम्बर (आईएएनएस)। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग पर अड़े विपक्ष और इससे बचने की कोशिश करती दिख रही सरकार के अड़ियल रवैये के कारण मंगलवार को भी संसद के दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हो सका और उनकी कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
अलबत्ता लगातार आठवें दिन भी संसद में कोई कामकाज नहीं हो सका। संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने से पिछले आठ दिनों में प्रतिदिन 7.8 करोड़ रुपये के खर्च के हिसाब से देश को कुल 63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
बहरहाल, इस मसले को सुलझाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के एक दिन बाद भ्ीा संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का हंगामा बदस्तूर जारी रहा। दोनों सदनों की बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई लेकिन उसके कुछ देर बाद उसे कार्यवाही अपराह्न् 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दल, वामदल, समाजवादी पार्टी और एआईएडीएमके के सदस्यों ने जेपीसी के गठन तथा प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग को लेकर दोनों सदनों में नारेबाजी और शोरगुल जारी रखा।
उधर, राज्यसभा में सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों ने भी कर्नाटक के बेल्लारी बंधुओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ी तख्तियां उठा रखी थीं।
संसद का शीतकालीन सत्र गत नौ नवंबर को शुरू हुआ था तभी इस मामले को कई बार संसद की कार्यवाही बाधित हो चुकी है। पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के इस्तीफे के बावजूद गतिरोध टल न सका।
कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच जेपीसी से कराने की कोई जरूरत नहीं है। पार्टी ने हालांकि इसकी संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज करने से भी इंकार किया।
पार्टी के प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा, "पार्टी का विचार है कि इस मामले की जांच जेपीसी से कराने की कोई जरूरत नहीं है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को लोक लेखा समिति (पीएसी) देख रही है। पार्टी इसके बाद इस मामले को देखेगी।"
प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि सरकार किसी मुद्दे पर चर्चा कराने से पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने कहा, "संसद को चलाने की जिम्मेदारी सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष दोनों की बनती है।"
शकील ने उम्मीद जताई कि संसद में जारी गतिरोध समाप्त करने का कोई रास्ता निकल आएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पीएसी के 'काम का आकलन कम' नहीं करना चाहिए।
उधर, कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि यदि संसद में जारी गतिरोध कुछ और दिनों तक चलता है तो कांग्रेस शीतकालीन सत्र को पहले स्थगित करने की सिफारिश कर सकती है।
इस बीच, लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर विपक्ष की जेपीसी की मांग पर प्रधानमंत्री जल्द फैसला लेकर देश के सामने अपना और अपनी पार्टी का रुख साफ करें। रूडी ने जोर दिया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने से नहीं चूकेंगे।
संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने से पिछले आठ दिनों में प्रतिदिन 7.8 करोड़ रुपये के खर्च के हिसाब से देश को कुल 63 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को पहले ही अत्यधिक नुकसान हो चुका है। इसके बाद जेपीसी से जांच कराने की मांग से पैदा हुए गतिरोध से भी भारी नुकसान हुआ है।
आधिकारिक आकंड़ो के मुताबिक संसद के दोनों सदनों और संसदीय मामलों के मंत्रालय के लिए वित्त वर्ष 2010-11 में 535 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान रखा गया है।
संसद में साल में तीन सत्र- बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र होते हैं। पिछले पांच सालों (2005-09) में हर साल औसत रूप से संसद की 68 बैठकें हुई हैं। इसे देखते हुए संसदीय कार्यवाही का प्रतिदिन का खर्च 7.8 करोड़ रुपये बैठता है।
यूं तो संसदीय ढांचा पर रोज खर्च होता है, लेकिन संसदीय खर्च का एक मात्र मकसद संसद की कार्यवाही ही होता है। इसलिए प्रतिदिन का खर्च संसद में होने वाली बैठकों के हिसाब से ही जोड़ा जाना चाहिए। अन्यथा लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों और इससे संबंधित कार्यालयों पर होने वाले खर्च का कोई अर्थ नहीं है।
सत्तापक्ष और विपक्ष देश की संपत्ति को हो रहे नुकसान का दोष एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं।
कांग्रेस सांसद अश्वनी कुमार ने आईएएनएस से कहा कि सरकार हर मसले पर बात करने के लिए तैयार है, लेकिन लेकिन विपक्ष चर्चा को बाधित कर लोकतांत्रिक संस्था को निष्प्रभावी कर रहा है।
उधर, रूडी ने कहा कि सरकार का प्रमुख एक अर्थशास्त्री है। उन्हें सरकार के रुख के कारण देश को रहे नुकसान के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी भाकपा के सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि पार्टी संसदीय कार्यवाही को बाधित नहीं होने देना चाहती है, लेकिन सरकार अपने रुख पर अड़ी हुई है।
सरकार किसी तरह 10 मिनट से भी कम अवधि में 15 नवंबर को संसद में सात दस्तावेज और दो रिपोर्ट पेश कर पाई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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