अमरीका, रूस ने की निंदा, चीन ने की अपील

अमरीका, रूस ने की निंदा, चीन ने की अपील

अमरीका और रूस ने कोरियाई प्रायद्वीप में उत्तर कोरिया के तोपों से गोले दागने की निंदा की है. उधर चीन ने आहवान किया है कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति बनाए रखी जाए और तनाव को और बढ़ने न दिया जाए.

उत्तर कोरिया के तोपों से गोले दागने और दक्षिण कोरियाई नियंत्रण वाले एक टापू पर व्यापक क्षति पहुँचाने के बाद दक्षिण कोरिया ने जवाबी कार्रवाई की है. टापू पर भीषण आग लगी हुई है.

उत्तर कोरिया ने तोपों से 200 गोले दागे

दक्षिण कोरिया के दो सैनिक मारे गए हैं और कई सैनिक घायल हुए हैं. अनेक घरों के तबाह हो जाने से कई नागरिक भी घायल हुए हैं.

अमरीका ने उत्तर कोरिया से कहा है कि वह अपनी आक्रामक कार्रवाई को तत्काल बंद करे.

रूस के विदेश मंत्री सेरगई लेवरॉव ने कहा है कि इसके बहुत गंभीर ख़तरे हो सकते हैं और जो हमले कर रहे हैं उन पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है.

उत्तर कोरिया के एक मात्र अंतरराष्ट्रीय सहयोगी चीन कभी-कभार ही उत्तर कोरिया की आलोचना करता है लेकिन उसने दोनों पक्षों से शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कहा है.

चीन ने ये भी कहा है कि ये बहुत ज़रूरी है कि छह देशों की वार्ता दोबारा शुरु की जाए.

चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता हॉंग ली का कहना था, "ये बहुत ज़रूरी है कि छह देशों की वार्ता दोबारा शुरु की जाए." इन वार्ताओं का मक़सद है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को बंद किया जा सके.

उत्तर कोरियाई नेता किम जौंग इल इस साल दो बार चीन की यात्रा कर चुके हैं. चीन के कूटनीतिक और आर्थिक समर्थन के कारण ही उत्तर कोरिया दुनिया में अलग-थलग होने के बावजूद डटा हुआ है.

क्या है उत्तर कोरिया की मंशा : एक विश्लेषण

लेकिन चीन के इस देश के साथ रिश्ते अमरीका को रास नहीं आ रहे हैं, विशेष तौर पर उस समय नहीं जब उत्तर कोरिया यूरेनियम संवर्द्धन की ओर बड़े क़दम उठा रहा है.

बीबीसी के कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है, "...ये बाहर की दुनिया को उत्तर कोरिया की ताकत दर्शाता है और अनेक पर्यवेक्षक मानते हैं कि ये भी संकेत देता है कि शीर्ष उत्तर कोरियाई सत्ता तंत्र में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं..."

उनका कहना है, "निश्चित तौर पर तो नहीं कहा जा सकता कि उत्तर कोरिया के भीतर क्या हो रहा है. लेकिन संकेत हैं किम इल उन को किम जौंग इल का उत्तराधिकारी बनाया गया है और इससे एक अनिश्चितता का दौर शुरु हो जाता है."

ग़ौरतलब है कि इस तनाव और गोलाबारी का असर आर्थिक जगत पर भी हुआ है. पहले ही यूरोप वित्तीय उथल-पुथल से गुज़र रहा है और दोनों कारणों से एशियाई बाज़ार गिरे हैं और मुद्रा की कीमतों पर भी असर पड़ा.

दक्षिण कोरियाई केंद्रीय बैंक ने एक आपात बैठक बुलाई है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर इस घटनाक्रम के असर का आकलन किया जा सके.

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