प्रधानमंत्री से मिले प्रणब मुखर्जी

जानकारों के मुताबिक मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को बताया कि विपक्ष संसद की लोकलेखा समिति से इस मामले की जांच कराए जाने का सुझाव मानने को तैयार नहीं हैं।

मुखर्जी ने सभी दलों के नेताओं को भोज पर आमंत्रित किया था। भोज में विपक्षी दलों ने सरकार के इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया कि 2जी स्पेक्ट्रम पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का अवलोकन करने के लिए लोक लेखा समिति के साथ किसी अन्य जांच दल को जोड़ा जाए।

मुखर्जी ने विपक्षी नेताओं को बताया कि प्रधानमंत्री से मशविरा कर वे दोबारा उनसे मिलेंगे।

कांग्रेस ने यद्यपि अपना यह रुख बरकरार रखा है कि कैग की रिपोर्ट का अवलोकन संयुक्त संसदीय समिति से नहीं बल्कि लोकलेखा समिति से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी के सदस्य करेंगे। इसके बावजूद एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति की मांग पर विचार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति की मांग को मान लेना सरकार के लिए हार नहीं है।

सूत्र ने बताया कि संप्रग के एक साझेदार डीएमके ने बैठक में कहा कि यदि संयुक्त संसदीय समिति गठित की जाती है तो 1999 से स्पेक्ट्रम आवंटन पर नीतिगत निर्णय की जांच की जानी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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