जवाब देने में देरी के लिए प्रधानमंत्री दोषी नहीं : स्वामी
स्वामी ने न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति ए. के. गांगुली की पीठ से कहा, "मेरे पत्र पर फैसला देने में देर करने के पीछे प्रधानमंत्री की गलत मंशा नहीं थी।"
अदालत स्वामी की उस याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि चूंकि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा था, इसलिए प्रधानमंत्री को उनके पत्र के आधार पर ए. राजा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आादेश देने के लिए निर्देश नहीं दिया जा सकता था।
स्वामी ने अदालत से कहा कि प्रधानमंत्री को पता नहीं था कि इस मामले में क्या किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में देरी पूरी तरह नौकरशाही और कानून मंत्रालय की ओर से हुई।
उन्होंने कहा कि किसी ने भी प्रधानमंत्री को नहीं बताया कि इस बारे में कानून क्या कहता है और कानून को लागू कैसे किया जाए।
उन्होंने कहा कि न तो प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने और न ही कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने प्रधानमंत्री को बताया कि इस बारे में उन्हें ही फैसला लेना है कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत राजा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए आदेश देना है या नहीं।
स्वामी ने कहा कि उन्होंने समय बचाने के लिए सबसे पहले प्रधानमंत्री से संपर्क किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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