संसद : 8 दिनों में बर्बाद हो गए 63 करोड़ रुपये

विवादास्पद 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से देश को पहले ही अत्यधिक नुकसान हो चुका है। इसके बाद संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग से पैदा हुए गतिरोध से भी भारी नुकसान हुआ है।

संसद के शीतकालीन सत्र के 9 नवंबर को शुरू होने के बाद पहले दिन को छोड़कर किसी भी दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्रवाई पूरे दिन के लिए नहीं चल पाई।

आधिकारिक आकंड़ो के मुताबिक संसद के दोनों सदनों और संसदीय मामलों के मंत्रालय के लिए वित्त वर्ष 2010-11 में 535 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान रखा गया है।

संसद में साल में तीन सत्र- बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र होते हैं। पिछले पांच सालों (2005-09) में हर साल औसत रूप से संसद की 68 बैठकें हुई हैं। इसे देखते हुए संसदीय कार्यवाही का प्रतिदिन का खर्च 7.8 करोड़ रुपये बैठता है।

यूं तो संसदीय ढांचा पर रोज खर्च होता है, लेकिन संसदीय खर्च का एक मात्र मकसद संसद की कार्यवाही ही होता है। इसलिए प्रतिदिन का खर्च संसद में होने वाली बैठकों के हिसाब से ही जोड़ा जाना चाहिए। अन्यथा लोकसभा और राज्यसभा सचिवालयों और इससे संबंधित कार्यालयों पर होने वाले खर्च का कोई अर्थ नहीं है।

सत्तापक्ष और विपक्ष देश की संपत्ति को हो रहे नुकसान का दोष एक दूसरे पर मढ़ रहे हैं।

कांग्रेस सांसद अश्वनी कुमार ने आईएएनएस से कहा कि सरकार हर मसले पर बात करने के लिए तैयार है, लेकिन लेकिन विपक्ष चर्चा को बाधित कर लोकतांत्रिक संस्था को निष्प्रभावी कर रहा है।

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि सरकार का प्रमुख एक अर्थशास्त्री है। उन्हें सरकार के रुख के कारण देश को रहे नुकसान के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी भाकपा के सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि पार्टी संसदीय कार्यवाही को बाधित नहीं होने देना चाहती है, लेकिन सरकार अपने रुख पर अड़ी हुई है।

सरकार किसी तरह 10 मिनट से भी कम अवधि में 15 नवंबर को संसद में सात दस्तावेज और दो रिपोर्ट पेश कर पाई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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