64 की उम्र में पढ़ने और सीखने की ललक
लखनऊ, 23 नवंबर (आईएएनएस)। दोस्तों के साथ घूमना, मौज-मस्ती और कॉलेज की कैंटीन में चाय की चुस्कियां लेने के आनंद को 64 साल की उम्र में भी उत्तर प्रदेश के जय गोपाल तिवारी अनुभव कर रहे हैं।
भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त जय गोपाल तिवारी सोनभद्र जिले के एक लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। तिवारी ने आईएएनएस से कहा, "मेरा मानना है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। आदमी में हर उम्र में सीखने की ललक होनी चाहिए।" वह कहते हैं कि छात्र के तौर पर अपना पंजीकरण कराने के बाद उन्हें महसूस हो रहा है कि जैसे उनके कॉलेज के सुनहरे दिन वापस लौट आए हैं।
उन्होंने कहा, "मैं अपने आप को थोड़ा भाग्यशाली मानता हूं क्योंकि मुझे छात्र के तौर पर कॉलेज जीवन का लुत्फ उठाने का अवसर दोबारा मिला। दोस्तों के साथ घूमना और कैंटीन में चाय की चुस्कियों का खूब आनंद ले रहा हूं..इस सबसे मैं खुद को एक नौजवान महसूस करता हूं।"
तिवारी ने भारतीय वायु सेना में 1963 में एयरक्राफ्टमैन के तौर पर नौकरी शुरू की थी लेकिन 1978 में कुछ पारिवारिक मजबूरियों के चलते उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। तिवारी को इसका कोई मलाल नहीं है।
वह कहते हैं कि नौकरी पूरी करके रिटायर होता तो ज्यादा अच्छा था पर मुझे इसकी बहुत खुशी है कि मैंने 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में भाग लिया।
मूल रूप से मेरठ के स्वराजपथ कस्बे के रहने वाले तिवारी ने दीना राम पब्लिक लॉ कॉलेज (सोनभद्र) की प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद एलएलबी में दाखिला लिया। फिलहाल वह एलएलबी चतुर्थ वर्ष में अध्यनरत हैं और सोनभद्र में किराये का मकान लेकर पढ़ाई कर रहे हैं।
तिवारी जोर देते हैं, "आप कह सकते हैं कि मुझे देश की सेवा और परिवार की जिम्मेदारियों से फुर्सत के बाद अब अपनी पढ़ाई की इच्छा को पूरी करने का समय मिला है।
दूसरे कोर्स न चुनकर एलएलबी की पढ़ाई करने की वजह पूछे जाने पर वह कहते हैं कि जिंदगी में कई अवसरों पर मुझे कानून का महत्व समझ्झ में आया। मेरा मानना है कि कानून की पढ़ाई से हमें संविधान द्वारा दिये गये तमाम अधिकारों का प्रयोग करने की जानकारी मिलती है.हममें से अधिकतर लोग कानून के बुनियादी सिद्धांतों से अपरिचित होते हैं।
वह कहते हैं, "संवैधानिक अधिकार मिले होने के बावजूद हम जानकारी के अभाव में उनका प्रयोग अपने हित में नहीं कर पाते..मैं कभी इनका प्रयोग कर पाऊं या नहीं इस बारे में तो मुझे नहीं पता, लेकिन कम से जानकारी होने के बाद लोगों को कानून की बुनियादी जानकारी देकर सामाज सेवा तो कर सकूंगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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