मप्र में 2 वर्षो में 866 बच्चों पर हुआ टीका का परीक्षण

प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री महेंद्र हार्डिया ने विधायक पारस सखलेचा द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में बताया कि पिछले दो वर्षो में कुल 869 बच्चों पर टीका और दवा का परीक्षण किया गया है। ये सभी परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने कराए हैं। इसके लिए चिकित्सकों को राशि का भुगतान भी किया गया है।

हार्डिया ने बताया कि वर्ष 2010 में सर्वाइकल कैंसर (ग्रीवा कैंसर) और गुप्तांग कैंसर के लिए वी-503 टीका का 44 बच्चों व युवतियों पर परीक्षण किया गया है।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने कहा कि विश्व में ऐसा कोई कानून नहीं है, जिससे दवा परीक्षण रोका जा सके। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने नए दवा परीक्षणों पर रोक लगाने के साथ ही इन मामलों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है।

विधायक सखलेचा का आरोप है कि उन्होंने दवा व टीका परीक्षण की छह वर्ष की जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें केवल दो साल की जानकारी दी गई है। इतना ही नहीं उन्हें जो जानकारी दी गई है, वह अपूर्ण एवं भ्रामक है। उनका कहना है कि सर्वाइकल व गुप्तांग कैंसर मूल रूप से यूरोपीय देशों में होता है। मध्य प्रदेश में यह बीमारी न के बराबर है।

उन्होंने सवाल किया है कि प्रदेश में डेंगू, चिकनगुनिया, कुपोषण, फैल्सीफेरम मलेरिया से अधिकतर मौतें होती हैं। इन बीमारियों पर दवा परीक्षण करने की बजाय यूरोपीय देशों की बीमारी के लिए टीका और दवा परीक्षण किया जा रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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