छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर कम करें : गुरचरण दास
गुरचरण दास ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्व विद्यालय के 12वें रजत जयंती व्याख्यान में कहा कि प्राथमिक शिक्षा में हमारा रिकार्ड अच्छा नहीं है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बंद करने की दर बहुत अधिक 90-94 फीसदी तक है। इस व्याख्यान का विषय था, 'जब तक शासन में सुधार न किया जाए, तब तक समृद्धि तो बढ़ेगी, लेकिन खुशी नहीं बढ़ेगी'।
उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में 54 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 24 फीसदी बच्चे निजी विद्यालय में पढ़ते हैं।
दास ने सरकार को सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा वाउचर देने का सुझाव दिया और कहा कि इससे सरकारी शिक्षकों पर अच्छी तरह पढ़ाने का दबाव पड़ेगा, क्योंकि इस व्यवस्था में शिक्षकों का वेतन बच्चों के शिक्षा वाउचर से आएगा।
उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था से अच्छी उम्मीद जताते हुए कहा कि यह दूसरी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार में कमी हो रही है और यहां की अर्थव्यवस्था 8 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि विकास एक जगह पर जाकर रुक जाएगा, यदि हम शासन में सुधार नहीं करें।
उन्होंने कहा कि भारत को आर्थिक विकास पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आर्थिक विकास के रुकने का सबसे बुरा प्रभाव गरीबों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि समेकित विकास के लिए विकास के मॉडल को बदलने की जरूरत नहीं, बल्कि प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य के विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हमारे यहां संसाधन की समस्या नहीं है बल्कि जवाबदेही की समस्या है। चीन में राजनीतिक व्यवस्था में सुधार होने से पहले यदि भारत शासन व्यवस्था में सुधार कर ले, तो हम दौड़ जीत सकते हैं। हमारे यहां आजादी है, लेकिन खराब शासन है। चीन में ठीक उल्टी बात है। हमें खुश रहने के लिए दोनों चीजें चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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