जेपीसी की मांग पर गतिरोध कायम, सर्वदलीय बैठक बेनतीजा (लीड-3)
सर्वदलीय बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा दिन में एक बजे बुलाई गई थी। यह बैठक लगभग एक घंटे तक चली। बैठक के बाद मुखर्जी ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से विचार-विमर्श के बाद वह फिर से विपक्षी नेताओं से मिलेंगे ताकि संसद में जारी गतिरोध खत्म हो सके। उन्होंने सभी दलों के नेताओं का आह्वान किया कि वे गतिरोध खत्म करने के लिए बातचीत से कोई रास्ता निकालें।
इस बैठक के दौरान सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं और ऐसे में इसे लोक लेखा समिति के हवाले किया जा सकता है। इस बारे में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने कहा, "हमने सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रस्ताव नहीं माना जाएगा।"
बैठक के बाद राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष अजित सिंह ने भी कहा, "गतिरोध जारी रहेगा।" इस घोटाले की वजह से इन दिनों संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही नहीं चल पा रही है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के अनुसार 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन नियमों को ताक पर रखकर किया गया जिससे सरकार को लगभग 176,000 करोड़ रुपये की चपत लगी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता एस. एस. अहलूवालिया ने कहा कि सरकार ने जांच तंत्र को लोक लेखा समिति से जोड़ने का प्रस्ताव रखा लेकिन विपक्षी दलों को यह स्वीकार्य नहीं है।
अहलूवालिया ने कहा, "विपक्ष ने एक मत से इस प्रस्ताव का विरोध किया।" उन्होंने कहा कि विपक्ष जेपीसी की मांग को लेकर अडिग है।
उन्होंने कहा कि जेपीसी पूछताछ के लिए मंत्री और प्रधानमंत्री को भी बुला सकती है।
अहलूवालिया ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मंत्रियों की नियुक्ति की प्रक्रिया को उद्योगपतियों द्वारा प्रभावित किए जाने का मुद्दा भी उठाया।
अहलूवालिया के मुताबिक यह मुद्दा भी संसदीय समिति की जांच के दायरे में शामिल रह सकता है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री की भूमिका सवालों के घेरे में है और जेपीसी जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
दासगुप्ता ने कहा, "प्रधानमंत्री की निष्क्रियता से राजकोष को भारी नुकसान हुआ है। इस मामले की जांच जेपीसी ही कर सकती है।"
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपों से घिरे ए. राजा केंद्रीय दूरसंचार मंत्री पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि इस मामले पर राजा का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है बल्कि जेपीसी का गठन किया जाना चाहिए। इसी को लेकर संसद के दोनों सदनों में बीते कई दिनों से गतिरोध बना हुआ है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय पर भी सवाल खड़े करने के बाद विपक्ष के हमले और तेज हो गए हैं।
विपक्षी सदस्यों ने सोमवार सुबह लोकसभा की कार्यवाही आरम्भ होते ही हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा थमता न देख लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले दो दिवंगत सदस्यों डॉक्टर वसंत पवार और अमरपाल सिंह एवं दिल्ली के ललिता पार्क इलाके में ढही इमारत में मारे गए लोगोंको श्रद्धांजलि दी गई। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए। नतीजतन कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा जैसी स्थिति राज्यसभा में भी रही। कार्यवाही आरम्भ होते ही विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। इस वजह से कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही फिर आरम्भ होने पर भी गतिरोध बना रहा जिसके बाद कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। बीते दो सप्ताहों में भी इसी मसले पर संसद की कार्यवाही बाधित हुई थी।
उधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए अगर सरकार जेपीसी का गठन नहीं करना चाहती है तो इसका कोई ठोस विकल्प सुझाए। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, "अगर सत्ताधारी पार्टी जेपीसी का गठन नहीं चाहती तो उसे एक ठोस विकल्प के साथ सामने आना चाहिए।"
इस घोटाले की वजह से देश को 176,000 करोड़ रुपये की चपत लगने का हवाला देते हुए येचुरी ने कहा, "मुख्य मुद्दा यह है कि उस रकम को कैसे वापस पाया जाए जो देश को गंवानी पड़ी है। सरकार को इस मामले में समाधान निकालना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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