'ईमानदारी का नियम न्यायिक पदों के लिए भी' (लीड-1)
नई दिल्ली, 22 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि यदि उच्च पदों की नियुक्तियों में विशुद्ध ईमानदारी और निष्ठा के मापदंड का हर मामले में पालन किया जाए तो सभी न्यायिक नियुक्तियां संवीक्षा के दायरे में आ जाएंगी।
महान्यायवादी जी.वाहनवती ने प्रधान न्यायाधीश एस.एच.कपाड़िया के नेतृत्व वाली पीठ को बताया कि संविधान के अनुसार विशुद्ध ईमानदारी व निष्ठा का मापदंड हर नियुक्ति के लिए है।
इसके पहले अदालत ने सरकार से पूछा था कि क्या केंद्रीय सतर्कता आयुक्त पी.जे.थामस अपने खिलाफ लगे विभिन्न आरोपों के बीच प्रभावी रूप से काम कर सकते हैं।
अदालत ने आश्चर्य व्यक्त किया कि जो व्यक्ति आरोपी है और जो आरोप पत्र का सामना कर रहा है, वह किसी निगरानी संस्था का नेतृत्व भला कैसे कर सकता है।
अदालत ने महान्यायवादी से कहा कि दो सप्ताह बाद जब मामले की सुनवाई होगी तो इस तर्ज पर बहस करने के लिए तैयार रहें।
इस बीच सरकार ने थामस की नियुक्ति से सम्बंधित सभी विवरण अदालत को सौंप दिए हैं। इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृह मंत्री पी.चिदम्बरम और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के बीच हुए विचार-विमर्श का विवरण भी शामिल है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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