मप्र में 143 दिनों में 3096 आत्महत्याएं
प्रदेश के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता द्वारा विधानसभा में जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि 16 जून 2010 से पांच नवंबर 2010 के बीच 3096 लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। इस मामले में खंडवा अव्वल रहा है जहां 353 लोगों ने मौत को गले लगाया। इसके अलावा प्रदेश में तीन जिले ऐसे हैं जहां 200 से ज्यादा लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। इनमें से सागर में 246 और जबलपुर में 200 लोगों ने आत्महत्याएं की हैं।
कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत के सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने बताया है कि छह जिले ऐसे हैं जहां इस अवधि में 100 से ज्यादा आत्महत्याएं हुई हैं। रीवा में 156, इंदौर में 155, सतना में 135, खरगोन में 120, सीधी में 115 और छतरपुर में 109 लोगों ने खुदकुशी की है।
विधानसभा में दिए गए जवाब से पता चलता है कि लगभग साढ़े चार माह की अवधि में हुई आत्महत्याओं में से चार मामले किसानों के हैं। दो किसानों ने भोपाल और एक-एक किसान ने उज्जैन व रायसेन में आत्महत्याएं की हैं। इनके कारण अलग अलग बताए गए हैं।
आत्महत्या के बढ़ते प्रकरणों पर मनोरोग विशेषज्ञ राहुल शर्मा का कहना है कि सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं पूरी दुनिया में असुरक्षा और कुंठा के कारण आत्महत्या की घटनाएं बढी हैं। इनमें किशोर व युवा ज्यादा हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ है।
शर्मा का मानना है कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। एक वर्ग सुविधा सम्पन्न जीवन जी रहा है तो दूसरी ओर कुछ लोगों को दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल रही है। इन हालातों में कुंठा बढ़ी है, और यह कुंठा आक्रामकता बढ़ाती हैं। इस आक्रामकता से सम्बंधित व्यक्ति या तो दूसरे को खत्म कर देता है अथवा खुद को खत्म कर लेता है। दूसरे को खत्म करने अथवा व्यवस्था बदलने में वह नाकाम रहता है और खुद को दांव पर लगा लेता है। इतना ही नहीं उनके आदर्श भी बदलकर दोषपूर्ण हो रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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