श्रद्धा एवं उत्साह से मनी गुरुनानक देव की जयंती (लीड-1)
अमृतसर/चण्डीगढ़, 21 नवंबर (आईएएनएस)। सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव की 541वीं जयंती के मौके पर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर प्रकाश से जगमग हो उठा। गुरुपर्व के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने यहां प्राथनाएं कीं।
मंदिर के पवित्र स्थल हरमंदर साहिब के गर्भगृह में हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटे और प्रार्थनाएं कीं।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा, "यह दिन हमारे लिए अत्यंत पवित्र है। गुरुपर्व यहां के अलावा देश के अन्य भागों में भी श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक मनाया जाता है।"
उन्होंने कहा, "गुरुनानक देव ने हमें वचनबद्धता और सच्चाई का मार्ग दिखाया। हम इस पर्व को जाति और मजहब के संकीर्ण विचारों से ऊपर उठकर अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाते हैं।"
गुरुनानक देव की जयंती मनाने के लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के गुरुद्वारों में श्रद्धालु रविवार तड़के जुटने लगे थे।
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा, "गुरु नानक देव एक आध्यात्मिक दूत थे, जिन्होंने हमें ईश्वर की उपासना करते हुए मोक्ष का मार्ग दिखाया। उन्होंने जाति और कर्मकांड रहित एक समाज का स्वप्न देखा था।"
चण्डीगढ़ से 15 किलोमीटर दूर पंचकुला स्थित नादा साहिब गुरुद्वारे में भी अपार संख्या में श्रद्धालु जुटे।
पंजाब के सभी गुरुद्वारों में 'लंगर' (सामुदायिक रसोई) का आयोजन किया गया।
उधर, इस पर्व के मौके पर पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब जिले में पाकिस्तान, भारत, कनाडा और विश्व के अन्य हिस्सों से 15,000 से अधिक सिख एकत्र हुए। इनमें 4,000 श्रद्धालु केवल भारत से पहुंचे। यहां गुरुद्वारा जन्म स्थान पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह का रविवार को समापन हो गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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