गैस पीड़ितों की तीसरी पीढ़ी ने मांगा हक
बच्चों ने प्रधानमंत्री और मंत्री समूह के संयोजक पी. चिदम्बरम के नाम पत्र भी लिखा है।
पीड़ित परिवारों के बच्चों और महिलाओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह डॉउ केमिकल व कार्बाइड कंपनी को बचाने के लिए पीड़ितों के हितों पर कुठाराघात कर रही है। यह बात प्रमाणित भी हो चुकी है कि 26 वर्ष पहले रिसी गैस का अनुवांशिक असर हो रहा है। इसके बाद भी गैस पीड़ित बच्चों को पुनर्वास व मुआवजे का लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार ने साढ़े पांच लाख लोगों को मुआवजे से वंचित कर दिया है।
भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की संयोजिका साधना कार्णिक प्रधान और सीटू के जिला महासचिव पी.एन. वर्मा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में बच्चों ने केंद्र सरकार से उनकी समस्याओं को समझने की गुहार लगाई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम को लिखे पत्र में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड से रिसी गैस का असर तीसरी पीढ़ी पर भी हुआ है। बीमारियों ने उनके जीवन को संकटपूर्ण बना दिया है। इतना कुछ होने के बाद भी मंत्री समूह ने साढ़े पांच लाख लोगों को स्वास्थ्य, पुनर्वास और मुआवजे से वंचित कर दिया है।
पत्र में बच्चों की शिकायतों को मंत्री समूह की बैठक में गंभीरता से लेने के लिए कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि वैज्ञानिक व चिकित्सकीय शोध से यह स्थापित हो चुका है कि मिथाइल आइसो साइनाइट (मिक) का आनुवांशिक प्रभाव हुआ है, लिहाजा इस आधार पर उन्हें सुविधाएं मिलनी चाहिए।
पत्र में मुआवजे से वंचित किए जाने के फैसले को निरस्त करने और गैस रिसाव से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों के आधार पर करने की मांग की गई है। साथ ही हादसे के मुख्य आरोपी अमेरिकी नागरिक वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण की भी मांग की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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