संबंधों की नई शुरूआत के लिए श्रीलंका जाएंगे कृष्णा
श्रीलंका में एक साल पहले तमिल विद्रोहियों से युद्ध समाप्ति के बाद भारत की ओर से पहली बार यह उच्चस्तरीय दौरा हो रहा है। इस दौरान कृष्णा राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।
श्रीलंका में वर्ष 1983 से शुरू हुए सशस्त्र संघर्ष में करीब 90,000 लोग मारे गए थे। युद्ध समाप्ति के बाद भारत अब इस अवसर को नए संबंधों की शुरूआत के रूप में देख रहा है। कृष्णा का यह तीन दिवसीय दौरा इसकी शुरूआत मानी जा रही है।
इस दौरे में भारत और श्रीलंका अर्थव्यवस्थाओं में खुलापन लाने, संपर्क बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों में वृद्धि पर जोर देंगे।
भारत और श्रीलंका इसके जरिए अपने सैन्य संबंधों को भी बढ़ावा देना चाहते हैं।
कृष्णा और श्रीलंकाई विदेश मंत्री जी. एल. पेरिस कोलंबो में एक संयुक्त आयोग की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। कृष्णा एक आवासीय योजना और उत्तरी श्रीलंका की एक रेलवे लाइन का उद्घाटन करेंगे।
भारत इस बात को लेकर सचेत है कि श्रीलंका में अल्पसंख्यकों को स्वायत्तता देने के श्रीलंकाई नेताओं के दावों का क्रियान्वयन किया जाएगा।
भारत इस मुद्दे को उठाएगा लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कृष्णा 1989 के बाद तमिल जनसंख्या वाले जाफना जाने वाले पहले विदेश मंत्री होंगे। 1989 में के. नटवर सिंह जाफना गए थे।
कोलंबो में उच्चायोग के अलावा अब केन्डी में भी भारत का वाणिज्य दूतावास है। साथ ही अब तक नई दिल्ली में पासपोर्ट कार्यालय के प्रमुख रहे वी. महालिंगम जाफना में भारत के दूत होंगे। हेमबन्टोटा में भारतीय वाणिज्य दूतावास का कार्यभार के. एन. मोहनकुमारन संभालेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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