नेपाल में माओवादियों के बेतुकेपन की चर्चा
पश्चिमी गोरखा जिले के अज्ञात से गांव पालंगतार में पहुंचने के लिए ठीक से न तो सड़क की सुविधा है और न पानी और बिजली की आपूर्ति ही। लेकिन बैठक के लिए इस गांव को रातोंरात एक छोटे शहर के रूप में तब्दील कर दिया गया। माओवादी कार्यकर्ताओं ने पार्टी की छठी आम बैठक के लिए सड़क बनाया, झुग्गियां खड़ी की और तालाब खोद डाला। इस बैठक में इस बात पर निर्णय लिया जाएगा कि क्या माओवादियों को वापस संघर्ष का रास्ता चुनना चाहिए, या अपनी गुरिल्ला सेना को भंग कर सत्ताधारी पार्टियों को मई 2011 के मध्य तक नया संविधान लिखने में सहयोग करना चाहिए।
वर्ष 2005 में चुनबांग गांव में हुई पार्टी की आम बैठक के बाद यह दूसरी चर्चित बैठक है, जिसमें लगभग 6,000 माओवादी नेता शिरकत करेंगे। 2005 की बैठक में माओवादियों ने हथियार डालने का निर्णय लिया था और प्रमुख पार्टियों के साथ एक गठबंधन खड़ा किया था।
चुनबांग की बैठक ने एक शांति समझौते का मार्ग प्रशस्त किया था और उसके बाद दशक पुराने हिंसक संघर्ष का अंत हो गया था। उस हिंसक संघर्ष का, जिसमें 16,000 से अधिक लोग मारे गए थे।
यह महज संयोग ही है कि छठी आम बैठक शांति समझौते की चौथी बरसी पर होने जा रही है और जिन पार्टियों के साथ शांति समझौता हुआ था, आज माओवादियों का उनके साथ 36 का आकड़ा हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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