प्राकृतिक आपदाओं से पाकिस्तान में भारी तबाही हुई
इस पुस्तक का शीर्षक है "नेचुरल हजार्ड्स, यूएन-नेचुरल डिसास्टर्स : द इकोनॉमिक्स ऑफ इफेक्टिव प्रीवेंशन"। इस पुस्तक में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़े हुए खतरे को देखते हुए इस तरह की आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बहुत कुछ किया जाना चाहिए था।
समाचार पत्र 'डेली टाइम्स' ने रविवार को कहा कि आंधी, बाढ़, भूकम्प, और सूखे के कारण 1970 से 2008 के बीच 33 लाख से अधिक मौतें हो चुकी हैं और 2,300 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।
विश्व बैंक-संयुक्त राष्ट्र की इस पुस्तक में कहा गया है कि खराब नीतियों और आचरणों के कारण प्राकृतिक आपदाएं अक्सर भयानक रूप अख्तियार कर लेती हैं।
पुस्तक में कहा गया है, "इन प्रश्नों का गहराई में जाकर जवाब ढूढ़ने से कि क्या हुआ और क्यों हुआ, इस तरह की आपदाओं पर लगाम लगा सकता है।"
पुस्तक में कहा गया है कि आपदाओं से होने वाले नुकसान की मात्रा बढ़ती जा रही है और इसकी रोकथाम की स्थिति और नाजुक होती जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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