भारत को मिल सकती है सर्वश्रेष्ठ अमेरिकी प्रौद्योगिकियां
गुलशन लूथरा
नई दिल्ली, 21 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के हाल के भारत दौरे से बनी साख के कारण भारत को अमेरिका से कुछ सर्वश्रेष्ठ रक्षा प्रौद्योगिकियां और अन्य तरह की प्रौद्योगिकियां हासिल हो सकती हैं। यह कहना है कि इंडो-अमेरिकन चैम्बर ऑफ कामर्स में भारत-अमेरिका रणनीतिक संवाद के अध्यक्ष विवेक लाल का।
अमेरिका में शिक्षित लाल भारत में बोइंग के रक्षा, अंतरिक्ष और सुरक्षा मामलों के उपाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने रक्षा पत्रिका 'इंडिया स्ट्रेटजिक' को बताया कि अमेरिका पिछले कुछ वर्षो से भारत के लिए लगातार अपने दरवाजे खोल रहा है। और दोनों सरकारों के बीच सम्बंधों के आधार पर भारत विज्ञान, अंतरिक्ष, रक्षा और कृषि क्षेत्र में अमेरिकी संस्थानों से कुछ अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से लाभ उठा सकता है।
अनुसंधान में अमेरिका का निवेश दुनिया के किसी भी देश से अधिक है, और उसका थोड़ा सा भी प्रवाह भारत को विकास सम्बंधी कई सारी परियोजनाओं में लाभ पहुंचा सकता है।
ज्ञात हो कि लाल औपचारिक रूप से यूएस नेशनल एयरोनाटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बीच रक्षा सौदों पर टिप्पणी नहीं कर सकते, क्योंकि यह दोनों देशों की सरकारों के बीच का मामला है, लेकिन वह इस बात को पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि भारत को प्रौद्योगिकियों के स्थानांतरण में वृद्धि, वाशिंगटन-नई दिल्ली के बीच सहयोग में वृद्धि पर निर्भर करेगा।
लाल ने भारत में बोइंग के सैन्य उपकरणों की बिक्री का नेतृत्व किया है, परिणामस्वरूप आठ बोइंग पी8-1 मल्टी मिशन मैरीटाइम एयरक्राफ्ट और 10 सी-17 ग्लोबमास्टर-3 रणनीतिक हेवी लिफ्ट विमान की बिक्री हुई है। भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने छह और सी-17 का प्रस्ताव किया है, जबकि नौसेना पहले ही चार अतिरिक्त पी8-आई हासिल करने के अपने इरादे की घोषणा कर चुकी है।
बोइंग ने वीआईपी इस्तेमाल के लिए बोइंग 737 आधारित व्यावसायिक विमान भी भारत को बेचे हैं, जबकि 24 हारपून ब्लॉक 2 पोत रोधी मिसाइल का सौदा तय होने की प्रक्रिया में है।
लाल ने कहा कि अमेरिकी सैन्य उपकरणों की बिक्री के लिए सीआईएसएमओए (कम्युनिकेशन्स इंट्रोपेराबिलिटी एंड सिक्युरिटी मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट) या बीईसीए (बेसिक एक्स्चेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट फॉर जियोस्पैटियल कोऑपरेशन) जैसे खास नियामकों से सम्बंधित कोई भी प्रतिबंध सभी देशों के लिए है, न कि सिर्फ भारत के लिए।
लाल ने कहा कि चूंकि यह भारत व अमेरिका की सरकारों के बीच का संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए वह इसके तह में नहीं जा सकते, लेकिन वह यह जरूर कह सकते हैं कि अगले दशक में या उसके बाद भारत उच्च स्तर की रक्षा एवं दोहरे इस्तेमाल सम्बंधी प्रौद्योगिकियों से लाभ उठा सकता है, क्योंकि भारत को ये प्रौद्योगिकियां प्रदान की जा रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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