'अधिक टीवी देखने वाले बच्चे होते हैं आक्रामक'
शनिवार को जारी हुए एक अध्ययन में सप्ताह में 35 घंटे से अधिक टीवी देखने वाले बच्चों के बारे में यह खतरा सबसे अधिक बताया गया है।
एसोसिएटेड चैबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया (एसोचैम) के सामाजिक विकास फाउंडेशन के इस अध्ययन में छह से 17 साल के 2000 से अधिक बच्चों और लगभग 3000 माता-पिता से पूछताछ की गई। सर्वे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, पटना और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में किए गए।
एसौचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा कि अधिक टीवी देखने का पढ़ाई पर होने वाला असर अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
अध्ययन में पता चला है कि रोजाना तीन घंटे टीवी देखने वाले वयस्क में रोजाना एक घंटे से कम टीवी देखने वाले वयस्क की तुलना में थुलथुल होने की संभावना अधिक होती है।
अधिकतर अभिभावकों ने बताया कि टीवी देखते समय बच्चे सुस्त होते हैं और प्राय: कुछ खाते रहते हैं। यही नहीं टीवी पर आने वाला विज्ञापन भी उन्हें अस्वास्थ्यकर लेकिन ऊर्जा से भरपूर पदार्थ खाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
करीब 90 फीसदी अभिभावकों ने बताया कि प्राइम टाइम पर आने वाले कार्यक्रम में अत्यधिक खराब भाषा का इस्तेमाल हो रहा है।
बहुत सारे बच्चों ने बताया कि जब वे अकेले टीवी देखते हैं तो वे कार्यक्रम नहीं देखते हैं, जो वे माता-पिता के सामने देखते हैं। इसी तरह 76 फीसदी बच्चों ने रिएलिटी शो को पसंद करने की बात कही।
अधिकतर अभिभावकों ने टीवी कार्यक्रमों में कामुकता और हिंसा को कम करने वाले नियमों का समर्थन किया।
सर्वेक्षण ने टीवी कार्यक्रमों को युवाओं की 10 फीसदी हिंसक गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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