नक्सलियों को नेपाल में प्रशिक्षण, राजनीतिक हलचल तेज
काठमांडू, 20 नवंबर (आईएएनएस)। नेपाल की माओवादी पार्टी पर भारत के नक्सलियों को हथियार और प्रशिक्षण देने के भारत के आरोप को लेकर नेपाल के राजनीतिक हलकों की बेचैनी खुलकर सामने आ रही है। नेपाल की संसदीय समिति ने सरकार से भारत की ओर से भेजे गए गोपनीय पत्र को सार्वजनिक करने की मांग की है लेकिन विदेश मंत्रालय ने ऐसा करने इंकार कर दिया है।
नेपाली मीडिया के मुताबिक संसद की अंतर्राष्ट्रीय और मानव अधिकार मामलों की समिति ने शनिवार को विदेश मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री सुजाता कोइराला को सम्मन जारी करके कहा है कि वह भारतीय दूतावास द्वारा एक महीने पहले भेजे गए विवादित पत्र को उसके समक्ष प्रस्तुत करें।
इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि नेपाल की माओवादी पार्टी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की मदद से भारत के नक्सलवादियों को हथियार और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है।
कोइराला हालांकि शुक्रवार को समिति के समक्ष पेश नहीं हुईं लेकिन विदेश सचिव मदन कुमार भट्टराई ने इस मामले में लिखित जवाब भेजा है कि इस मामले में जांच जारी होने और कूटनीतिक गोपनीयता के चलते इस पत्र को नहीं सौंपा जा सकता है।
विदेश सचिव ने कहा कि विदेश मंत्रालय के आग्रह पर गृह मंत्रालय भारत के इन आरोपों की जांच कर रहा है कि बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के करीब 300 नक्सलियों को इस साल नेपाल के कम से कम दो शिविरों में प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से एक नेपाली माओवादी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का शिविर है।
नेपाली माओवादियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि यह नेपाली सेना की रिपोर्ट पर आधारित है जो कि नेपाली प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के आदेश पर काम कर रही थी।
यह विवाद और उग्र हो गया जब सांसदों ने भारतीय दूतावास द्वारा गृह और विदेश मंत्रालय दोनों को पत्र भेजे जाने पर आपत्ति जताई।
अंतर्राष्ट्रीय और मानव अधिकार मामलों की समिति ने कहा कि गृह मंत्रालय से सीधे संचार करना कूटनीतिक नियमों के खिलाफ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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