2जी स्पेक्ट्रम : प्रधानमंत्री ने दिया दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा (राउंडअप)
वहीं सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में शनिवार को दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर मुकदमे की मांग को लेकर भेजे गए हर पत्र का जवाब दिया था।
प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा दाखिल किए गए इस हलफनामे में जनता पार्टी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी के आवेदन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा प्रस्तुत किया गया है।
राजा के इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान देते हुए 2जी स्पेक्ट्रम मामले में प्रधानमंत्री ने कहा, "किसी के भी मन में इस संबंध में कोई भी संशय नहीं होना चाहिए कि यदि किसी के द्वारा कुछ भी गलत किया गया है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। लोकतंत्र में यह नियम सबके लिए है। मुझे लगता है कि हमें संसद को चलने देना चाहिए।" उन्होंने कहा कि इस पर मैं कोई विस्तृत बयान नहीं दूंगा क्योंकि संसद का सत्र अभी चल रहा है।
दिल्ली में 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के योग्य करार देते हुए सत्ता में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और राजनीति में औसत उम्र कम करने की भी वकालत की। उन्होंने आतंकवाद, युवाओं और आर्थिक विकास से जुड़े मसलों एवं देश के समक्ष मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अगले वित्त वर्ष में विकास की दर दहाईं अंक में पहुंचने की आशा जताई।
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद से विपक्ष का हमला और तेज हो गया है। इस मामले में दूरसंचार मंत्री पद से ए. राजा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इस मामले में मैं यह कह सकता हूं कि एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं। हम संसद में सभी मसलों पर चर्चा के लिए तैयार हैं। हम चर्चा से नहीं डरते। मैं सभी पार्टियों से आग्रह करता हूं कि वे संसदीय कामकाज को चलने दें।"
विपक्ष इस मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने पर अड़ा हुआ है और इसी को लेकर बीते दो सप्ताह से संसद के शीतकालीन सत्र में कोई कामकाज नहीं हो सका। दूसरी ओर सरकार इस कथित घोटाले की जांच जेपीसी से कराने से इंकार करती रही है।
उसका तर्क रहा है कि लोक लेखा समिति इस मामले की जांच में सक्षम है और ऐसे में जेपीसी के गठन की जरूरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी हैं।
मनमोहन सिंह ने कहा, "यह अक्सर कहा जाता है कि यह इम्तिहान का वक्त है। यह सच है कि भारत में हमारे लिए हमेशा इम्तिहान की घड़ी होती है। कभी-कभी मैं खुद को एक स्कूली छात्र की तरह महसूस करता हूं जिसे एक के बाद एक परीक्षा देनी होती है।"
आर्थिक विकास की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष विकास की दर 10 फीसदी के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "हम उन चंद देशों में शामिल हैं जो वैश्विक आर्थिक संकट से जल्द उबरने में सफल रहे। पिछले साल हमारी विकास दर 7.4 फीसदी रही। इस साल विकास दर 8.5 फीसदी और अगले वर्ष नौ-10 फीसदी रहने की उम्मीद है।"
प्रधानमंत्री ने यहां मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि सत्ता में मौजूद लोगों की औसत उम्र कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं यह कहने में सक्षम नहीं हूं कि मंत्रिमंडल में मैं क्या फेरबदल करने जा रहा हूं। जब यह फेरबदल होगा तब सबको पता चल जाएगा।"
मनमोहन सिंह ने एक बार फिर दोहराया कि मंत्रिमंडल में एवं राजनीति में ज्यादा से ज्यादा युवा लोगों को शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं इस विचार को प्रस्तुत करना चाहता हूं कि हमें सत्ता में मौजूद लोगों की औसत उम्र कम करनी चाहिए। हमें ज्यादा युवा लोगों को आगे लाना चाहिए।"
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह देश का नेतृत्व करने में सक्षम नेता हैं। उन्होंने कहा, "मैं कह चुका हूं कि राहुल गांधी में प्रधानमंत्री बनने के सभी गुण मौजूद हैं। निश्चित रूप से कई बार मुझे लगा कि सत्ता की कुर्सी मेरे बजाय युवा व्यक्ति के पास होनी चाहिए।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "मानवता को समेकित रूप में भूख, गरीबी, आतंकवाद, बीमारियों, भ्रष्टाचार, निरक्षरता और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई लड़नी है। कई बार परीक्षा होती है। कई बार लड़ाई से पहले परीक्षण होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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