2जी स्पेक्ट्रम : संसद में गतिरोध कायम (राउंडअप)

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गंभीर सवाल उठाए जाने पर हरकत में आई केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि मंगलवार को होने वाली अगली सुनवाई में महान्यायवादी (एटार्नी जनरल) जी. वाहनवती प्रधानमंत्री कार्यालय का पक्ष रखेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय में अब तक सरकार का पक्ष महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने रखा है। माना जा रहा है कि महाधिवक्ता ने जिस तरह से सरकार का पक्ष न्यायालय में रखा है, उससे सरकार संतुष्ट नहीं है, जिसके चलते उसे यह बदलाव करना पड़ा है।

वाहनवती ने कहा, "मैं न्यायालय में मंगलवार को सरकार का पक्ष रखूंगा।"

सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि उन्होंने वर्ष 2008 में सुब्रह्मण्यम स्वामी के आवेदन पर ए. राजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की अनुमति क्यों नहीं दी। ए. राजा ने पांच दिन पहले स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आरोपों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

जानकार सूत्रों के मुताबिक महाधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम दूरसंचार विभाग (डॉट) की ओर से और अतिरिक्त महाधिवक्ता हरिन रावल केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से मामले की पैरवी करेंगे।

आवंटन मामले पर प्रधानमंत्री की 'चुप्पी' पर विपक्ष ने संसद में जमकर हंगामा किया, जिससे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही छठे दिन स्थगित हुई।

भारतीय जनता पार्टी, वामपंथी, समाजवादी पार्टी और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के सदस्यों ने दोनों सदनों में आवंटन घोटाले की जांच जेपीसी से कराने की मांग को नारे लगाए।

उधर, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर संसद की कार्यवाही रोकने वाली विपक्षी पार्टियों से संसद में कामकाज चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच के खिलाफ नहीं हैं।

केनरा बैंक की 105वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक समारोह से इतर वित्त मंत्री ने पत्रकारों से कहा, "संसद में जिस तरह का माहौल उत्पन्न किया जा रहा है, उससे मैं काफी चिंतित हूं। इससे संसद में कामकाज नहीं हो पा रहा है। इसलिए मैं सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करता हूं कि वे इसका हल निकालने की कोशिश करें।"

मुखर्जी का यह बयान दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई)की उस सिफारिश के बाद आया है, जिसमें उसने 69 ऑपरेटरों को दिए गए 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन रद्द करने करने के लिए कहा है।

मुखर्जी ने कहा, "मैं विपक्ष से अनुरोध करूंगा कि वे संसद की कार्यवाही में अवरोध उत्पन्न न करें। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट की जांच लोक लेखा समिति करेगी। इसके बाद सरकार देखेगी कि इस मामले में किस तरह की कार्रवाई की जरूरत है।"

उल्लेखनीय है कि विपक्ष गत छह दिनों से 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच जेपीसी से कराने की मांग कर रहा है। माना जा रहा है कि मनमाने ढंग से किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन से देश के राजकोष को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

उधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि कांग्रेस-द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के बीच हुई डील के तहत उन्होंने डीएमके को देश को लूटने की खुली छूट दी।

दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि उनका मंत्रालय ट्राई की सिफारिशों पर विचार करेगा। जबकि कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि कांग्रेस किसी भी मंच पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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