'स्वामी के हर पत्र पर कार्रवाई हुई' (लीड-1)

हलफनामे में कहा गया है कि स्वामी द्वारा अक्टूबर 2009 में प्रधानमंत्री को लिखे गए एक पत्र से पता चलता है कि तत्कालीन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए.राजा के खिलाफ 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी सम्बंधी उनकी मांग के संदर्भ में उठाए गए कदमों के बारे में उन्हें (स्वामी) जानकारी थी।

सूत्रों ने कहा है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितता के आरोपों से निपटने के संदर्भ में प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए कदमों की इस स्वीकारोक्ति को सरकार उस समय सामने लाएगी, जब सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार को मामले की सुनवाई करेगा।

सूत्रों ने कहा है कि स्वामी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया जाएगा कि स्वामी ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी अदालत से छुपा रखी है और उन्होंने सारी जानकारी अदालत को नहीं दी है।

हलफनामे में कहा गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने राजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी सम्बंधी स्वामी के आवेदन पर मई 2009 में विधि मंत्रालय से राय मांगी थी।

विधि मंत्रालय ने फरवरी 2010 में अपना जवाब दिया था। विधि मंत्रालय ने कहा था कि चूंकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) मामले की पहले से जांच कर रहा है, लिहाजा प्रधानमंत्री को किसी तरह की मंजूरी देने की कोई आवश्यकता नहीं है। हलफनामे में कहा गया है कि स्वामी के 20 नवम्बर, 2008 के आवेदन पर जवाब देने में प्रधानमंत्री की ओर से कोई देरी नहीं हुई थी।

हलफनामे में इस बात का ब्योरा दिया गया है कि स्वामी के हर पत्र पर कितने उचित तरीके से प्रतिक्रिया दी गई थी।

10 पृष्ठों के इस हलफनामे में स्वामी के पत्रों के संदर्भ में पीएओ द्वारा उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया गया है।

यह हलफनामा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को दिए गए निर्देश के अनुसार पीएमओ के एक निदेशक की ओर से दाखिल किया गया।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी.एस.सिंघवी और न्यायमूर्ति ए.के.गांगुली की पीठ ने पीएमओ को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके पहले महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने अदालत को गुरुवार को बताया था कि स्वामी के हर पत्र का जवाब दिया गया था और उस संदर्भ में कदम भी उठाए गए थे।

स्वामी ने, मार्च 2010 में प्राप्त हुए एक जवाब के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय से किसी जवाब के प्राप्त होने से इंकार किया है।

स्वामी ने कहा है कि उन्होंने 20 नवम्बर, 2008 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तत्कालीन संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए.राजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आपराधिक मामला चलाने की मंजूरी मांगी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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