प्रसार भारती के कार्यो पर 3 सदस्यीय दल रखेगा नजर
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर.वी. रवींद्रन एवं न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक की खंडपीठ ने कार्यालयी आदेश को बहाल करते हुए कहा कि प्रसार भारती के दिन-ब-दिन के कार्यो की तीन सदस्यीय समिति निगरानी करेगी। समिति में सदस्य (वित्त) एवं (कार्मिक) भी रहेंगे।
प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बलजीत सिंह लाली ने दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर 20 अगस्त, 2009 को कार्यालयी आदेश जारी किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उच्च न्यायालय के निर्देश का अनुमोदन किया।
लाली ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्देश को चुनौती दी थी जिसमें अदालत ने न केवल प्रसार भारती बोर्ड के स्थायी सदस्यों में से तीन को समिति में रखने को कहा था, बल्कि लाली पर लगे वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेज दिया था।
जनहित अभियोग केंद्र (सीपीआईएल) की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि 24 अगस्त, 2009 को जारी अदालत के आदेश के तुरंत बाद लाली ने फिर से तीन सदस्यीय समिति तो गठित की, लेकिन अपनी पुरानी कार्यशैली में एकतरफा फैसला लेना शुरू कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय को बताया गया कि लाली प्रसार भारती बोर्ड से परामर्श लिए बिना पिछले दो साल से एकतरफा फैसला लेते रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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