मप्र में खसरे से रोजाना 32 बच्चों की मौत
भोपाल, 19 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में बच्चों पर खसरे का प्रकोप अब भी जारी है। हाल यह है कि हर रोज औसतन 32 बच्चों की खसरा से मौत हो रही है। इस तरह साल भर में 12 हजार बच्चे सिर्फ खसरे के चलते दुनिया से विदा ले लेते हैं। यह देशभर में खसरे से होने वाली मौतों का आठ प्रतिशत है।
यह खुलासा भारत सरकार के परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य विभाग, मध्य प्रदेश सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित मीडिया कार्यशाला में हुआ।
कार्यशाला में बताया गया कि हालात से निपटने के लिए राष्ट्रव्यापी योजना बनाई गई है, जिसमें मध्य प्रदेश के पांच जिलों का चयन किया गया है।
कार्यशाला में रखे गए तथ्य के मुताबिक वर्ष 2000 के आंकड़ों के मुकाबले 2010 तक खसरे से होने वाली मौतों के आंकड़े में 90 फीसदी की कमी लाने के लिए वर्ल्ड हेल्थ एसेम्बली ने 2005 में वैश्विक लक्ष्य तय किया था। कोशिश जारी रहने पर खसरे से होने वाली मौतों में कुछ कमी दर्ज की गई, इसके बावजूद 2008 के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बताते हैं कि दुनिया में खसरे से एक लाख 64 हजार बच्चों की मौत हुई है। इस तरह दुनिया में प्रतिदिन 450 बच्चे खसरे से मरे हैं।
वर्ल्ड हेल्थ एसेम्बली के निर्देश पर 193 देशों ने टीकाकरण की योजना को अपना लिया था, केवल भारत ही ऐसा था, जहां इसके लिए कोई योजना नहीं बनी थी।
देश में खसरे से होने वाली मौतों पर काबू पाने के लिए खसरे के टीकाकरण की योजना अब शुरू की गई है। प्रारंभिक तौर पर देश के चुनिंदा जिलों में यह काम किया जा रहा है। इसी के तहत मध्य प्रदेश के पांच जिले चुने गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुब्रत रोइत्रा ने बताया कि दूसरे चरण में जरूरी है कि पहले चरण के लक्ष्य 80 प्रतिशत हासिल किया जाए। उन्होंने बताया कि देश के 13 राज्यों के 45 जिलों में इस योजना को लागू किया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश के बड़वानी, झाबुआ, शिवपुरी, अलीराजपुर और टीकमगढ़ शामिल हैं।
रोइत्रा मानते हैं कि खसरे का सीधा संबंध कुपोषण से है। खसरे के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता कम हो जाती है और अधिकांश बच्चे खसरे के बाद निमोनिया या हैजा के शिकार हो जाते हैं, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव एस.आर. मोहंती ने कहा कि चयनित पांच जिलों में टीकाकरण की स्थिति अच्छी नहीं है।
स्वास्थ्य मिशन के संचालक मनोहर अगनानी बताया कि नवंबर 2010 से फरवरी 2011 तक चलने वाले टीकाकरण अभियान में कुपोषित बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत स्कूलों से की जाएगी। जिन बच्चों को यह टीका लगाया जाएगा उनके हाथ में अमिट स्याही लगाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस अभियान में 40 हजार कर्मचारियों की मदद से 15 लाख से ज्यादा बच्चों को टीका लगाया जाएगा। कार्यशाला में यूनिसेफ की मध्य प्रदेश प्रमुख तान्या गोल्डनर ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधा पाना हर बच्चे का अधिकार है। इसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इस मौके पर भारत में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने बताया कि टीकाकरण से खसरे पर रोक लगाने के साथ बच्चों को जीवनदान मिलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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