गृहयुद्ध के बाद अब विकास : राजपक्षे (लीड 1)
राजपक्षे ने कहा कि पिछली बार हम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कई देशों के साथ मिलकर काम कर रहे थे। अब हम विकास के युग में प्रवेश कर गए हैं। हम उन देशों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं, जो हमें इसमें मदद कर सकते हैं।
राजपक्षे पर आरोप है कि उन्होंने पश्चिमी देशों की बजाय चीन, भारत, ईरान और पाकिस्तान को अधिक महत्व दिया।
कई पश्चिमी देशों ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के खिलाफ युद्ध में मानवाधिकार के हुए उल्लंघन के आरोप की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। श्रीलंका की सरकार ने उनकी मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
राजपक्षे ने कहा कि हमने आतंकवाद के खिलाफ पूरे देश को एक किया।
राजपक्षे ने राष्ट्रपति सचिवालय में मुख्य न्यायाधीश अशोका डी सिल्वा की मौजूदगी में शपथ ली।
राजपक्षे ने पहले कार्यकाल के पूरा होने से दो साल पहले ही जनवरी 2010 में ही चुनाव करा दिया था। इस चुनाव में उन्हें 57.81 फीसदी मत मिला। उसके बाद उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने में देर कर दी। इससे उन्हें अधिक समय तक राष्ट्रपति बने रहने का लाभ मिल गया।
इस अवसर पर उन्हें सेना ने सलामी दी। शपथ ग्रहण समारोह में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और भूटान के प्रधानमंत्री जिग्मे वाई. थिनले सहित देश-विदेश के कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
इस अवसर पर देश भर में अनेक धार्मिक और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।
सोमवार को उनके मंत्रिमंडल में फेरबदल करने का कार्यक्रम है। उसके बाद वह अगले साल के लिए बजट पेश करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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