इशरत मामला : अवमानना याचिका पर गुजरात सरकार को राहत (लीड-1)
अहमदाबाद, 19 नवंबर (आईएएनएस)। गुजरात सरकार के खिलाफ उच्च न्यायालय में दायर अवमानना याचिका पर न्यायालय ने शुक्रवार को सरकार को दो दिन की राहत दे दी। इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की अधिसूचना जारी न करने पर सरकार के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
यह याचिका प्रणेश पिल्लै उर्फ जावेद के पिता गोपीनाथ पिल्लै की ओर से शुक्रवार को दायर की गई। जावेद, मुम्बई की कॉलेज छात्रा इशरत सहित उन चार लोगों में शामिल था, जिन्हें जून 2004 में कथित रूप से मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
उच्च न्यायालय ने गत सितंबर में दिल्ली के संयुक्त पुलिस आयुक्त करनैल सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन करने का निर्देश दिया था, इसमें गुजरात कैडर के दो पुलिस अधिकारी मोहन झा और सतीश वर्मा को भी शामिल करने के लिए कहा गया था। न्यायालय ने इस मामले में सरकार से दो सप्ताह के भीतर एक अधिसूचना जारी करने और एसआईटी को तीन महीने में रिपोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था।
गुजरात सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। सर्वोच्च न्यायालय ने 12 नवम्बर को गुजरात सरकार की याचिका खारिज कर दी।
पिल्लै के वकील मुकुल सिन्हा ने अवमानना याचिका दायर कर अपनी दलील में कहा कि न्यायालय के आदेश के दो महीने बाद भी राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी नहीं की है।
इस मामले की सुनवाई कर रही न्यायाधीश ए.एम. कपाडिया और बी.एन. मेहता की पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई शुरू करने वाली थी कि इसी बीच सरकारी वकील ने न्यायालय से सरकार को दिन की अनुमति देने का अनुरोध किया।
सरकारी वकील ने न्यायालय को बताया कि सरकार इस मामले में शीघ्र ही अधिसूचना जारी करने वाली है।
उल्लेखनीय है कि जून 2004 में अहमदाबाद की अपराध शाखा ने मुम्बई की छात्रा इशरत जहां, प्रणेश पिल्लई उर्फ जावेद शेख, अहमद अली राणा और जीशन जोहर को फर्जी मुठभेड़ में अहमदाबाद के बाहरी हिस्से में मार डाला था। बाद में कहा गया था कि चारों आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा से सम्बद्ध थे और वे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की फिराक में थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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