असमान रूप से हुआ है देश का विकास : प्रधानमंत्री
नई दिल्ली, 19 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत का 'विकास असमान' रूप से हुआ है। उन्होंने कहा, 'हमें एक ऐसे देश की आवश्यकता है जो अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार, पारदर्शी, कुशल और अधिक ईमानदार हो।'
प्रधानमंत्री ने 10वें इंदिरा गांधी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा, "हमें एक ऐसे देश की आवश्यकता है जो अधिक संवेदनशील, जिम्मेदार, पारदर्शी, कुशल और अधिक ईमानदार हो। एक ऐसी स्थिति जहां देश अपने नागरिकों की परवाह करे।"
उन्होंने कहा, "देश की कुछ संस्थाएं अपना दायित्व निभाती हैं, जबकि कुछ इससे मुंह मोड़ती हैं, कुछ क्षेत्र लाभान्वित हुए हैं, जबकि कुछ इससे वंचित हैं। देश में विकास असमान रूप से हुआ है, लेकिन सरकार सभी को सामाजिक न्याय और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।"
उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन से मिश्रित परिणाम हासिल हुए हैं। उन्होंने कहा, "हमने उप्लब्धियां हासिल की हैं, जिससे गौरवान्वित और असफलताओं से सीख लिया जा सकता है।"
प्रधानमंत्री ने वर्ष 1990 में शुरू हुए आर्थिक उदारीकरण का हवाले देते हुए कहा, "हमने गलतियां की हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "हमारी विकास की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य सभी तरह के सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय असमानताओं को खत्म करने का होना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि सरकारी योजना एक खास समय में सभी समुदाय की गरीबी की समस्या को दूर करना चाहती है। खासकर इसमें जनजाति और पिछड़ा समुदाय शामिल है।
सिंह ने कहा कि राजनीतिक सोच को वास्तविकता में बदलने के लिए नई योजनाएं और नीतियां बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की उपलब्धि क्षेत्रीय विषमताओं की वजह से हर जगह समान रूप से नहीं मिल सकी है।
प्रधानमंत्री ने शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे लागू करने की ज्यादातर जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और जिला प्रशासनों पर बनती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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