अफ़ग़ानिस्तान पर नैटो की अहम बैठक

पुर्तगाल में शुक्रवार को नैटो सदस्यों की अहम बैठक हो रही है. माना जा रहा है कि संगठन के 61 साल के इतिहास में ये सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक है.
अफ़ग़ानिस्तान इस बैठक का मुख्य एजेंडा है. योजना ये है कि 2014 तक अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के सैन्य अभियान को ख़त्म किया जा सके.
इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति दिमित्रि मेदवेदेव भी हिस्सा लेंगे जो रूस के साथ नैटो के रिश्तों में सुधार को दर्शाता है. 2008 में जॉर्जिया विवाद के बाद नैटो बैठक में हिस्सा लेने वाले वे पहले रूसी राष्ट्रपति हैं.
नैटों के 28 देशों को उम्मीद है कि वो ये रणनीति तय कर पाएँगे कि अगले एक दशक में अगर संगठन पर कोई ख़तरा आता है तो उससे कैसे निपटना है.
अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई शनिवार को सम्मेलन को संबोधित करेंगे. वे चाहते हैं कि नैटो 2014 के अंत तक देश का नियंत्रण सौंप दें.
इस पर अमरीका के पेंटागन के प्रेस सचिव ने कहा है कि 2014 को लक्ष्य मानकर चला जा रहा है पर साथ ही ये भी कहा है कि ये ज़रूरी नहीं कि सभी नैटो सदस्य तब तक अफ़ग़ानिस्तान से चले जाएँ.
वापस जाने का लक्ष्य
वहीं बीबीसी से बातचीत में नैटो के महासचिव जनरल रासमुसन ने कहा है कि 2014 तक सुरक्षा का ज़िम्मा अफ़ग़ानिस्तान को सौंपा जाना एक वास्तविक लक्ष्य है जिसे हासिल किया जा सकता है.
अफ़ग़ानिस्तान में नैटे के नेतृत्व वाले गठबंधन में करीब एक लाख तीस हज़ार अंतरराष्ट्रीय सैनिक तैनात हैं.
बीबीसी के पॉल वुड का कहना है कि नैटो नहीं चाहता कि उसके सैन्य अभियान के अंत के बाद अफ़ग़ानिस्तान के कुछ हिस्सों में अफ़ीम माफ़िया सक्रीय रहे या लड़ाके सक्रिय हों.
संवाददाता के मुताबिक अगर अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा का स्तर इतना रहता है कि अफ़ग़ान सुरक्षा बल उससे निपट पाएँ तो नैटो समझेगा कि उसका काम हो गया है और सैनिक वापस आ सकेंगे.
इस बीच नैटो रूस के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है. सम्मेलन के दौरान मिसाइल डिफ़ेंस पर दोनों ओर से संयुक्त रूप से काम करने पर बात होगी.
बीबीसी संवाददाता के मुताबिक लिस्बन में होने वाले नैटो सम्मेलन में नैटो के भविष्य पर भी बात होगी, ख़ासकर ऐसे समय में जब हर देश में बजट कटौती हो रही है.


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