नेपाल में अधर में बजट

सुदेशना सरकार

काठमांडू, 19 नवंबर (आईएएनएस)। भयानक नकदी संकट से जूझ रही नेपाल सरकार की उस कोशिश को शुक्रवार को करारा झटका लगा है, जिसके तहत वह विपक्षी माओवादियों को राय में लेकर नया बजट पारित करने की कोशिश में थी। एक छोटी पार्टी ने सरकार के इस कदम में अड़ंगा लगा दिया है।

नकदी संकट से जूझ रहे प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने बिना किसी नए कार्यक्रम और नीतियों के शुक्रवार को संसद में एक पूर्ण बजट पारित करने के लिए माओवादियों को अंतत: राजी कर लिया था।

बजट पारित करने के साथ ही संसद नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए 17वें दौर का चुनाव भी आयोजित करने वाला था। लेकिन शुक्रवार को तराई से आने वाले एक पूर्व मंत्री व वर्तमान सांसद ने नया बजट पेश करने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा कि यह संसद को दरकिनार करने की चाल है।

मधेसी जनाधार फोरम के सह अध्यक्ष जयप्रकाश प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को यह कहते हुए सदन में आपत्ति दर्ज कराई कि कार्यवाहक सरकार ने संसद को दरकिनार करने के लिए राष्ट्रपति राम बरन यादव की मदद हासिल की है।

गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "बजट पेश करने के लिए कार्यवाहक सरकार को संविधान में संशोधन करने की आवश्यकता है और इसके लिए संसद की मंजूरी जरूरी है।"

गुप्ता ने कहा, "लेकिन सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश के जरिए संसद को दरकिनार कर दिया। यह स्थिति संसद को बेमानी बनाती है और हम इसका विरोध करते हैं।"

इस तरह वित्त मंत्री सुरेंद्र प्रसाद पांडे का 300 अरब नेपाली रुपये का महत्वाकांक्षी बजट एक बार फिर अधर में लटक गया है।

गुप्ता ने कहा, "सरकार मेरी आपत्ति पर सदन में चर्चा और इस पर मतदान कराए बगैर बजट पारित नहीं कर सकती।"

बजट की अनिश्चितता के साथ ही शुक्रवार को होने वाला मतदान भी अनिश्चितता में डूब गया।

ज्ञात हो कि अतीत में माओवादियों ने बजट में अड़ंगा लगाया था। माओवादियों ने उस समय कहा था कि कार्यवाहक सरकार को बजट पेश करने का कोई अधिकार नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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