बरकरार रह सकती है येदियुरप्पा की कुर्सी (लीड-1)
हुबली/नई दिल्ली, 19 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा के रिश्तेदारों द्वारा शुक्रवार को भूखंड वापस किए जाने के बाद समझा जाता है कि फिलहाल येदियुरप्पा की कुर्सी से खतरा टल गया है। येदियुरप्पा पर आरोप है कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों को नियमों का उल्लंघन कर भूखंड आवंटित किए थे।
येदियुरप्पा ने खुद उत्तरी कर्नाटक के हुबली में घोषणा की कि उनके रिश्तेदारों ने भूखंड वापस कर दिए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई के अध्यक्ष के.एस.ईश्वरप्पा ने दिल्ली में कहा कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल नहीं पैदा होता।
राज्य के पंचायती राज मंत्री व मुख्यमंत्री पद के सम्भावित दावेदार जगदीश शेट्टार ने भी संवाददाताओं को बेंगलुरू में बताया, "नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे को न तो किसी ने उठाया है और न इस पर कोई चर्चा ही चल रही है।" शेट्टार दिल्ली में होने जा रही बैठक में हिस्सा लेंगे।
इसके पहले येदियुरप्पा ने संवाददाताओं को बताया था कि भूखंड इसलिए वापस कर दिए गए, क्योंकि विपक्ष निराधार आरोप लगा रहा है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन कर अपने पारिवारिक सदस्यों को भूखंड आवंटित किया था।
भूखंड वापस किए जाने सम्बंधी यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का केंद्रीय नेतृत्व भूमि घोटाले से येदियुरप्पा का नाम जुड़ने के बाद की स्थिति पर शुक्रवार को चर्चा करने जा रहा है।
इसके पहले राज्य मंत्रिमंडल ने मुख्य रूप से बेंगलुरू और आसपास के इलाकों में पिछले 10 वर्षो के दौरान हुए सभी भूमि सौदों की जांच सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराए जाने को अपनी मंजूरी दे दी। न्यायाधीश के नाम और उसके अधिकार क्षेत्र की घोषणा होनी अभी बाकी है।
ईश्वरप्पा पार्टी के केंद्रीय नेताओं के साथ बैठक में हिस्सा लेने शुक्रवार सुबह ही दिल्ली पहुंच गए। भाजपा नेता यह सुनिश्चित कराने के लिए भावी कदम पर चर्चा करेंगे कि कर्नाटक का भूमि घोटाला कांग्रेस नेतृत्व वाली कें द्र सरकार में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे भाजपा के अभियान को पटरी से न उतार दे।
येदियुरप्पा और राज्य के कई अन्य नेताओं को भी बैठक के लिए तलब किया गया है। येदियुरप्पा शुक्रवार देर शाम दिल्ली पहुंच रहे हैं।
लौटाए गए भूखंड में चार हजार वर्ग फुट का आवसीय भूखंड शामिल है, जो बेंगलुरू के राजा महाल विलास एक्स्टेंशन में येदियुरप्पा के बेटे बी.वाई.राघवेंद्र को आवंटित किया गया था। राघवेंद्र मुख्यमंत्री के गृह जनपद शिमोगा से भाजपा सांसद हैं।
जितने भी भूखंड आवंटित किए गए हैं, येदियुरप्पा और भाजपा को सर्वाधिक शर्मसार इसी भूखंड के कारण होना पड़ा है, क्योंकि राघवेंद्र ने यह कहते हुए झूठा हलफनामा दायर किया था कि उनके पास बेंगलुरू में कोई आवासीय सम्पत्ति नहीं है।
बेंगलुरू विकास प्राधिकरण (बीडीए) का यह भूखंड मुख्यमंत्री द्वारा उनके विवेकाधीन 'जी' श्रेणी के कोटे के तहत आवंटित किया गया था। इस कोटे के तहत केवल उन्हीं लोगों को भूखंड आवंटित किया जा सकता है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर ली हो, मगर उनके पास कोई आवासीय सम्पत्ति न हो।
राघवेंद्र और उनके भाई बी.वाई.विजयेंद्र ने बेंगलुरू के बाहर जिगानी औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित दो एकड़ के प्रमुख औद्योगिक भूखंड को भी वापस कर दिया। यह भूखंड तब आवंटित किया गया था, जब येदियुरप्पा 2007 में उपमुख्यमंत्री थे।
येदियुरप्पा की बहन उमादेवी ने भी दो एकड़ के औद्योगिक भूखंड वापस कर दिया। यह भूखंड बेंगलुरू के बाहर हारोहल्ली में है। यह भूखंड तब आवंटित किया गया था, जब येदियुरप्पा 2008 में मुख्यमंत्री बने थे।
येदियुरप्पा की बहन, बहन के बेटे और बहू ने दो आवासीय भूखंडों को भी लौटा दिया है। ये भूखंड बेंगलुरू पश्चिम में चंद्रा लेआउट इलाके में स्थित है।
येदियुरप्पा यह कहते हुए अपना बचाव कर रहे हैं कि कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के उनके पूर्ववर्तियों ने भी ऐसा किया था।
कांग्रेस और जद (एस) येदियुरप्पा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, क्योंकि कथित भूमि सौदों में उन्होंने अपने परिवार को लाभ पहुचाया है। जद (एस) ने 50 अरब रुपये के घोटाले का दावा किया है।
येदियुरप्पा ने इस बात से इंकार किया है कि उन्होंने इन सौदे में कुछ गलत किया है। उन्होंने कहा है कि गुरुवार को घोषित मामले की न्यायिक जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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