पासपोर्ट मामले में अबु सलेम को 4 वर्ष कैद की सजा
अदालत ने सलेम को 16 नवंबर को दोषी करार दिया था और सजा शुक्रवार को सुनाई गई।
जिला अभियोजन अधिकारी राजेश रायकवार ने बताया कि अबु सलेम पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के आरोप में तीन धाराओं के तहत चले प्रकरण में से भारतीय दंड संहिता की धारा 471 और पासपोर्ट की धारा 12 (ख) के तहत न्यायालय ने दोषी करार दिया था।
सीजेएम आर.जी. सिंह ने शुक्रवार को बहस सुनने के बाद दोनों मामलों में दो-दो साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना तय किया है। इस तरह सलेम को चार वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना भुगतना होगा।
सजा सुनाए जाने के वक्त जिला न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी और पुलिस बल हर आने-जाने वाले पर नजर रखे हुए था।
मालूम हो कि वर्ष 2001 में अबु सलेम का दानिश बेग, उनकी पत्नी समीरा जुमानी का रुबीना बेग और पूर्व प्रेमिका मोनिका बेदी का फौजिया उस्मान के फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाया गया था। ये पासपोर्ट क्षेत्रीय कार्यालय से जारी किए गए थे। इस पर भोपाल के कोह-ए-फिजा थाने में 2001 में मामला दर्ज कराया गया था।
प्रकरण के मुताबिक भोपाल निवासी सैयद अब्दुल जलील शिराज ने इन तीनों के पासपोर्ट बनवाने में मदद की थी। इतना ही नहीं, भोपाल के राशनकार्ड भी बनाए गए थे। ट्रेवल्स एजेंट को 35 हजार रुपये प्रति पासपोर्ट की दर से पासपोर्ट बनवाने का जिम्मा दिया गया था। प्रकरण थाने में दर्ज होने के बाद शिराज खुद वादा माफ गवाह बन गया।
फर्जी पासपोर्ट मामले की सह अभियुक्त मोनिका बेदी को अबु सलेम के साथ लिस्बन से गिरफ्तार किया गया था और उसे लगभग एक साल भोपाल जेल में रहना पड़ा था। इस मामले से मोनिका और दो अन्य आरोपियों को पूर्व में बरी किया जा चुका है।
सलेम पर चल रहे मामले की सुनवाई एक नवंबर को पूरी हो गई थी और वह तभी से भोपाल के केंद्रीय जेल में है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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