उत्तराधिकार मेरे लिए गंभीर मुद्दा नहीं : दलाई लामा
दिल्ली में आयोजित 'एचटी लीडरशिप सम्मेलन' से इतर पत्रकारों से बातचीत करते हुए दलाई लामा ने कहा, "मेरे लिए उत्तराधिकार का मसला गंभीर नहीं है, लेकिन चीनी सरकार इसके प्रति ज्यादा गंभीर दिख रही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि दलाई लामा का एक संस्था के रूप में निरंतर काम करना तिब्बती लोगों की इच्छा पर निर्भर करता है।
आध्यात्मिक नेता ने कहा, "मैंने इससे पहले वर्ष 1969 में साफ कर दिया था कि तिब्बती लोगों को अगर ऐसा लगा कि दलाई लामा की एक संस्था के रूप में अब जरूरत नहीं रही। मैं उसी दिन इसे समाप्त कर दूंगा।"
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1959 में चीनी सेना के तिब्बत की राजधानी ल्हासा पर कब्जा करने के बाद दलाई लामा और उनके समर्थक भारत चले आए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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