दिल्ली हादसा : जिम्मेदारी तय करने के लिए दोषारोपण शुरू (राउंडअप)
रविवार शाम 8.15 बजे ललिता पार्क इलाके में गिरी पांच मंजिली इमारत के मलबे को बचाव दल के कर्मी सावधानी पूर्वक हटा रहे हैं। मलबे से अब तक 69 शवों को निकाला जा चुका है, जबकि घायल 82 लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
उधर, हादसे की जिम्मेदारी तय करने को लेकर दिल्ली में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम के बीच लड़ाई तेज हो चुकी है। इस मुद्दे पर गुरुवार को नगर निगम की स्थायी समिति की हुई बैठक में भाजपा और कांग्रेस पार्षद एक दूसरे से भिड़ गए।
दिल्ली सरकार ने दिल्ली नगर निगम पर अवैध पांच मंजिली इमारत को न रोकने और इमारत के तलघर में जमे पानी को न निकालने का आरोप लगाया।
दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष योगेंद्र चंदौलिया ने कहा, "अवैध इमारतों का निर्माण न रोकने लिए नगर निगम के अधिकारियों पर कई बार राजनीतिक दबाव पड़ता है। यदि राजनेता ईमानदारी से काम करें तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।"
उन्होंने बताया, "अवैध इमारत के मालिक अमृत पाल सिंह ने इस मामले में दिल्ली के वित्त मंत्री ए.के. वालिया, क्षेत्र के सांसद और विधायक का नाम लिया है। इससे साफ हो जाता है कि अवैध इमारतों के निर्माण में राजनीतिक दबाव काम करता है।"
उधर, वालिया जो इस क्षेत्र के विधायक भी हैं, उन्होंने दावा किया है कि वह कभी भी अमृतपाल सिंह से नहीं मिले।
इस बीच इमारतों से खाली कराए गए लोगों के रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। हादसे के बाद 38 अवैध इमारतों को खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है, लेकिन गुरुवार तक मात्र दो इमारतों को खाली कराया गया है।
इस हादसे में मारे गए लोगों में 29 महिलाएं और 17 बच्चे भी शामिल हैं। इमारत में ज्यादातर लोग पश्चिम बंगाल से आए गरीब कामगार वर्ग के थे।
दिल्ली नगर निगम ने माना है कि असुरक्षित इमारतों से खाली कराए गए लोगों के रहने की व्यवस्था उसने नहीं की है। उसने कहा कि लोगों के रहने की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के प्रभागीय आयुक्त (राजस्व) की है।
असुरक्षित इमारतों को छोड़ने के बाद लक्ष्मी नगर के सामुदायिक भवन में शरण लिए लोगों में से संध्या हलदर ने कहा, "हमारे पास खाने और दैनिक जरूरतों की कोई वस्तु नहीं है। करीब 100 लोग यहां रहने पर मजबूर हैं। यही नहीं शवों को भी यहां लाया जा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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