खाद संकट से मप्र के किसान चिंतित

भोपाल, 18 नवंबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के लगभग 20 जिलों में मानसून की बेरुखी के चलते हुई औसत से कम वर्षा से हताश किसानों में मावठ के गिरने से कुछ उम्मीद जगी, मगर खाद के संकट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों को खाद के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।

प्रदेश में इस बार औसत से 16 फीसदी कम बारिश हुई है। प्रदेश के 50 में से 20 जिले तो ऐसे हैं, जहां 25 फीसदी से कम बारिश हुई है। प्रदेश की 341 तहसीलों में से 135 को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।

कम बारिश के चलते इस बार रबी फसल को नुकसान होने की आशंका हर किसी को थी, मगर पिछले कुछ दिनों में गिरी मावठ ने किसानों को उत्साहित कर दिया है। खेतों में नमी आने के कारण बुवाई का काम तेज हो गया है और खाद की मांग बढ़ गई है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में मांग के मुकाबले सिर्फ एक तिहाई खाद ही उपलब्ध है। यही कारण है कि खाद का टोटा हो गया है। इसकी एक वजह केंद्र से आवंटन के मुताबिक खाद का प्रदेश में न पहुंचना भी है। इतना ही नहीं, नकली खाद का कारोबार करने वाले असली खाद की किल्लत का फायदा उठा रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि प्रदेश को नवंबर में कुल 3. 61 लाख मीट्रिक टन खाद का आवंटन किया जाना था, मगर अब तक सिर्फ 1.27 लाख मीट्रिक टन खाद ही मिला है। इस स्थिति में यदि प्रतिदिन रेल के सात रैक खाद आए, तभी कोटा पूरा हो सकेगा।

बताया जा रहा है कि उधर विदेशों से आई खाद बंदरगाह पर पड़ी है और इधर मध्य प्रदेश में खाद का संकट बना हुआ है।

कृषि विभाग के प्रमुख सचिव एम.एम. उपाध्याय ने आईएएनएस को बताया कि मावठ गिरने पर रबी फसल की बुवाई शुरू हो गई है। खाद की आपूर्ति के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार से भी संपर्क किया जा रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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