2जी स्पेक्ट्रम : कैग रिपोर्ट में नुकसान के अलग-अलग अनुमान
नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने संसद में रखी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस देने की प्रक्रिया में हुए नुकसान का सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है। क्योंकि यह कई कारकों पर आधारित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कारकों के अंदर स्पेक्ट्रम के अभाव का मूल्य, प्रतियोगिता का प्रकार, कारोबारी योजना, संचालकों की संख्या, विकास, बाजार की स्थिति, आदि आ सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए किसी गणितीय या अर्थशास्त्रीय मॉडल को आधार नहीं बनाया गया है। और कोई एक तय राशि पेश करने की अपेक्षा जो भी दस्तावेज उपलब्ध हैं, उससे मिलने वाले संकेतों के आधार पर ही अनुमान लगाया है।
कैग की रिपोर्ट में पेश किए गए आंकड़े इस प्रकार हैं :
क) 65,909 करोड़ रुपये : यह मूल्य 122 नए लाइसेंस और दोहरी प्रौद्योगिकी के लिए 35 अन्य के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नवंबर 2007 में स्टेल की ओर से लिखे गए पत्र पर आधारित है।
ख) 1.52 लाख करोड़ रुपये : यह मूल्य 122 नए लाइसेंस और दोहरी प्रौद्योगिकी के लिए 35 अन्य के लिए दूरसंचार नियामक की सिफारिशों पर आधारित है। इसमें कहा गया था कि 2जी की तुलना 3जी टेलीफोनी से की जानी चाहिए।
ग) 58,000 करोड़ से 68,000 करोड़ रुपये : यह मूल्य 122 नए लाइसेंस और दोहरी प्रौद्योगिकी के लिए 35 अन्य के लिए कुछ नई कंपनियों द्वारा विदेशी निवेशकों से हासिल किए जा सकने वाले संभावित प्रीमियम पर आधारित है।
कैग ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले से हुए नुकसान का मूल्यांकन करने वाला 96 पृष्ठ का दस्तावेज संसद में पेश किया है।
कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि स्पेक्ट्रम के आवंटन में पूरी स्वेच्छारिता दिखलाई गई है।
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला मामले पर दो साल से विवाद चल रहा था। घोटाले के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे केंद्रीय मंत्री ए. राजा के लगातार पद से त्यागपत्र देने से इंकार करते रहने के बाद आखिकार रविवार रात उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इस मामले पर लंबे समय से कांग्रेस और विपक्षियों के बीच तनातनी चल रही थी और संसद की कार्यवाही बाधित है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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