• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

मनमोहन की चुप्पी पर अदालत का सवाल

By Staff
|

मनमोहन की चुप्पी पर अदालत का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस मामले में कई सवाल उठाए हैं. दूरसंचार घोटाले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं और पूछा है कि क्या कोई ज़िम्मेदार अधिकारी किसी शिकायत पर इस तरह से चुप रह सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल इस्तीफ़ा दे चुके केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की अनुमति देने में हुए विलंब को लेकर उठाया है. जनता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने दो साल पहले प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ए राजा के ख़िलाफ़ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुमति माँगी थी. नियमानुसार किसी सरकारी पद आसीन व्यक्ति के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई के लिए अनुमति चाहिए होती है.

लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मामले पर चुप रहे. अब सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी को इस बात की अनुमति दे दी है कि वे चाहें तो ए राजा के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर सकते हैं. चूंकि अब ए राजा संचार मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं इसलिए अब उन पर आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए किसी की अनुमति की ज़रुरत भी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल मंगलवार को उठाया, जिस दिन संसद में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट संसद में पेश की गई. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मोबाइल फ़ोन के लिए टू-जी स्पैक्ट्रम आवंटन के मामले में नियमों की अनदेखी की गई, अयोग्य कंपनियों को लाइसेंस दिए गए और जिन दरों पर लाइसेंस दिए गए उससे सरकार को 1.70 लाख करोड़ रुपयों तक का घाटा हुआ.

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एके गांगुली के पीठ ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा, "क्या कोई ऐसा अधिकारी जिस पर कार्रवाई करने की अनुमति देने का अधिकार है, इतने समय तक चुप रह सकता है?"

पीठ ने कहा, "प्रशासन को सुचारु रुप से चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने का समय तय किया है. इतने समय में ज़िम्मेदार अधिकारी को अनुमति दे देनी चाहिए." सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अब तो 16 महीने हो गए. ज़िम्मेदार अधिकारी यह कह सकता है कि मैं इसकी अनुमति नहीं दे सकता. लेकिन कोई कार्रवाई न करना और चुप्पी साधे रहना परेशान करने वाला है."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "प्रधानमंत्री कह सकते थे कि जो दस्तावेज़ उपलब्ध करवाए गए हैं वो मुक़दमा चलाने की अनुमति देने के लिए अपर्याप्त हैं लेकिन वो 16 महीनों तक इस पर चुप्पी साधे नहीं बैठे रह सकते."

सुब्रमण्यम स्वामी ने 29 नवंबर, 2008 को दूरसंचार घोटाले के कागज़ात दिए थे. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जो कागज़ात स्वामी ने दिए थे वे आधारहीन भी नहीं थे. सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने जब प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए तो सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलीसिटर जनरल ने कहा कि ए राजा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए अब किसी अनुमति की ज़रुरत नहीं है.

इस पर मामले की शिकायत करने वाले सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि अब चूंकि ए राजा केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाए जा चुके हैं, अब उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए किसी की अनुमति की ज़रुरत भी नहीं रह गई है. उन्होंने भी प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, "मैंने जो दस्तावेज़ दिए थे उनके आधार पर प्रधानमंत्री को फ़ैसला लेना था. यदि वे संतुष्ट नहीं थे तो इस मांग को ख़ारिज कर सकते थे."

स्वामी का कहना था, "प्रधानमंत्री ने अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और वे इंतज़ार करते रहे कि उन्हें और दस्तावेज़ दिए जाएंगे." सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी के आवेदन पर सरकार के जवाब पर भी सवाल उठाए और कहा कि स्वामी ने 11 महीनों तक ख़ामोशी से इंतज़ार किया जबकि सरकार को तीन महीनों के भीतर इस बारे में फ़ैसला ले लेना था.

सुप्रीम कोर्ट की इस लताड़ के बाद प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि प्रधानमंत्री को देश को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने क्यों इस मामले में चुप्पी साधे रखी. पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा, "प्रधानमंत्री को देश को बताना चाहिए कि वे सुब्रमण्यम स्वामी के आवेदन पर क्यों चुप्पी साधे रहे और विभिन्न मंत्रालयों की राय पर भी कार्रवाई नहीं की."

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल का नेतृत्व करते हैं और वे सामूहिक निर्णयों के लिए ज़िम्मेदार होते हैं." वेंकैया नायडू ने कहा, "हम समस्या जानते हैं. प्रधानमंत्री कोई फ़ैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं. वे अपने अधिकारों का उपयोग करने की स्थिति में नहीं हैं." दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने आपको बचाते हुए कहा कि अभी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बयान को देखा नहीं है और इसका अध्ययन करने के बाद ही वे कुछ कह सकेंगे.

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more