विपक्ष की मांग पर प्रधानमंत्री की 'चुप्पी' (राउंडअप)
विपक्ष के सुर में सुर मिलाते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह प्रधानमंत्री का दायित्व बनता है कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मंगलवार को की गई 'गंभीर टिप्पणी' पर अपना जवाब दें। वामपंथी पार्टी ने भी इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया की मांग की है, लेकिन प्रधानमंत्री ने कुछ बोलने से इंकार कर दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "हमें इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करनी है।"
कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि न्यायालय की यह टिप्पणी 'काफी तकनीकी' है।
उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि सरकार के शीर्ष विधिक अधिकारी- महाधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा है कि सरकार अपनी स्थिति के बारे में और मामले की पृष्ठभूमि गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेगी।
सुब्रमण्यम ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में प्रधानमंत्री की आलोचना करने से कोई शर्मिदगी नहीं हुई है।
एक समाचार चैनल से सुब्रमण्यम ने कहा "सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी जरा भी शर्मनाक नहीं है।"
उधर, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी कहा कि न्यायालय में उचित प्रतिक्रिया दी जाएगी।
तिवारी ने कहा, "सरकार के जवाब के बारे में अनुमान लगाना अनुचित होगा।"
बिहार में चुनाव प्रचार करने पहुंचे आडवाणी ने कहा, "2जी स्पेक्ट्रम आवंटन विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय पर गंभीर टिप्पणी की है। बीते 60 वर्षो में प्रधानमंत्री कार्यालय पर ऐसी टिप्पणी मुझे याद नहीं है। प्रधानमंत्री का दायित्व बनता है कि वह इस टिप्पणी पर तुरंत बयान दें।"
आडवाणी ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराए जाने की मांग को दोहराया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि 'संदेहास्पद' 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला कैसे इतने दिनों तक चला। माकपा ने पूर्व संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए, राजा पर अभियोग चलाने की भी मांग की।
माकपा ने अपने एक बयान में कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि पूर्व दूरसंचार मंत्री पर अभियोग चलाने की अनुमति मांगने वाले आवेदन पर उन्होंने 11 महीनों तक देरी क्यों की।"
वामपंथी पार्टी ने पूछा है, "दूरसंचार घोटाले की जांच का बार-बार अनुरोध करने पर भी प्रधानमंत्री ने क्यों इजाजत देने से इंकार कर दिया।" राज्यसभा में माकपा नेता सीताराम येचुरी ने वर्ष 2008 में इस मामले की जांच के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था।
बयान में कहा गया है, "प्रधानमंत्री को संसद में इसका जवाब देना चाहिए कि इस संदेहास्पद मामले को इतने दिनों तक चलने क्यों दिया गया।"
उधर, जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को सरकार से सफाई मांगी कि वर्ष 2008 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में नियमों का उल्लंघन करने वाले तत्कालीन केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर अभियोग चलाने की मांग करने वाले आवेदन पर प्रधानमंत्री ने 15 महीने बाद क्यों जवाब दिया।
न्यायालय ने कहा, "प्रधानमंत्री की निष्क्रियता और चुप्पी हमें परेशान कर रही है।"
उल्लेखनीय है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट संसद में पेश होने से पहले राजा ने रविवार रात इस्तीफा दे दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन से 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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