स्पेक्ट्रम विवाद : प्रधानमंत्री की ओर से महाधिवक्ता देंगे जवाब
पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने 29 नवंबर 2008 में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत प्रधानमंत्री को आवेदन देकर तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा पर अभियोग चलाने की अनुमति मांगी थी।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की 'सलाह' दरकिनार करते हुए स्पेक्ट्रम आवंटन 'मनमाने' तरीके से किया गया। इससे 'राजकोष को 1.76 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।'
न्यायालय में गुरुवार को होने वाली सुनवाई में महाधिवक्ता को प्रधानमंत्री की ओर से हुई देरी पर सफाई देनी होगी। सुब्रमण्यम को न्यायालय को संतुष्ट करना होगा कि इस घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को प्राथमिकी दर्ज करने में 11 महीनों का समय क्यों लगा।
इसके अलावा राजा पर अभियोग चलाने की अनुमति मांगने वाले स्वामी के आवेदन पर प्रधानमंत्री को जवाब देने में हुई देरी पर भी महाधिवक्ता सफाई पेश करेंगे। साथ ही वह 2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस अयोग्य कंपनियों को देने पर भी जवाब देंगे।
न्यायालय इस सवाल को भी देखेगा कि किसी दागी केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति मांगने वाले आवेदन पर तीन महीने के भीतर जवाब देने के मसले पर तीन महीने की तिथि की गणना किस तिथि से प्रभावी मानी जाएगी। उस तिथि से जब सीबीआई मामला दर्ज कर जांच शुरू करती है अथवा उस तिथि से जब सीबीआई अपनी जांच समाप्त कर लेती है।
उल्लेखनीय है कि मंत्रियों के खिलाफ अभियोग चलाने के लिए पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को आवेदन देकर अनुमति लेनी पड़ती है। आवेदन पर प्रधानमंत्री कार्यालय तीन महीने के भीतर अपना निर्णय देता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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