दिल्ली मकान हादसा : सहायता में आगे आए लोग और संस्थाएं (लीड-1)

एक एनजीओ 'साउथ एशियन फोरम फॉर पीपुल अगेंस्ट टेरर' के कार्यकर्ताओं ने सोमवार रात से सड़क किनारे रह रहे इस हादसे में बचे करीब 100 लोगों को भोजन और पानी उपलब्ध कराया।

सोमवार संध्या पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में ललिता पार्क के पास अचानक गिर गए एक मकान में दब कर 66 लोगों की मौत हो गई और 82 लोग घायल हो गए।

गैरसरकारी संस्था के सदस्य अशोक रंधावा ने आईएएनएस से कहा कि हमने देखा कि लोग टीवी चैनल पर बता रहे हैं कि हादसे के पीड़ितों को भोजन और पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। हमने 100 लोगों के भोजन और पानी की व्यवस्था की है। कुछ और करने की कोशिश करते हैं।

इससे पहले भी मकान का मलबा हटाने और अन्य सहायता कार्य में सबसे पहले पड़ोस के आम लोग ही आगे आए थे। पड़ोसियों ने बताया कि सरकारी मदद काफी देर से पहुंची।

एक स्थानीय निवासी शका हलदर ने कहा कि मंगलवार देर रात तक मलबे के अंदर से आवाज आ रही थी। लेकिन अब किसी के बचे होने की कम ही संभावना है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी ही बचाव कार्य में सबसे पहले पहुंचे।

हलदर ने बताया कि खुद उन्होंने चार लोगों को मलबे के अंदर से खीच कर निकाला। उनमें से एक तो बच गया, लेकिन तीन लोगों ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।

बुधवार को अचानक बारिश शुरू हो जाने के कारण बचाव कार्य धीमा हो गया। घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने कहा कि लगभग 20 लोग अभी भी टूटी-फूटी दीवारों के ढेर मे दबे हुए हो सकते हैं। बचावकर्मियों ने कहा कि बुधवार सुबह तक अधिकतर मलबा हटा दिया गया था।

दुर्घटना में बचे लोगों का कहना है कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

उन्होंने कहा कि सोमवार रात से वे बाहर खुले में हैं। उन्हें भोजन और पानी नहीं मिल रहा है और ठंड से भी परेशानी हो रही है।

अधिकारियों ने आस-पास के तीन मकानों को खाली करा दिया है। करीब 200 लोग पार्क में रह रहे हैं।

कई लोगों को बुखार हो गया है, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिल रही है।

महिलाओं ने शौचालय ना होने की परेशानी के बारे में बताया। एक 16 वर्षीय किशोरी संध्या हलदर ने बताया कि पुलिस खाली कराए मकानों में शौच के लिए जाने से मना करती है। कोई और सार्वजनिक शौचालय नहीं है। इससे बहुत परेशानी हो रही है।

मिनौती के पति की इस घटना में मौत हो गई। वह अपने दो बच्चों को खोज रही है। उसने कहा कि शीला दीक्षित सरकार की मुआवजे की घोषणा की उसको कोई फिक्र नहीं है।

उसने रूंधे गले से कहा कि सरकार अपना पैसा अपने पास रखे। वह सिर्फ अपने बच्चों को देखना चाहती है। लेकिन राहत कार्य बहुत धीरे हो रहा है। यह कहते-कहते उसका गला भर आया।

एक स्थानीय निवासी लक्ष्मी हलदर ने कहा कि वह इस मकान में रहने वाले 20 लोगों को जानती है। उनमें तीन मारे गए, बाकी लोगों की खबर नहीं है।

उसने बिहार में उन लोगों के घरों में सूचना दे दी है। उसने कहा कि जब तक मैं उन लोगों का शव नहीं देख लूं या कोई सूचना नहीं मिल जाए, तब तक उन्हें क्या बताऊं। अस्पताल में भी उनकी तस्वीर नहीं लगाई गई है।

उसने कहा कि वह खुद बचाव कार्य में शामिल होना चाहती है।

इस मकान में बंगाल और बिहार के गरीब तबके के लोग रहते थे।

मकान के मालिक अमृत पाल सिंह को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। जहां से बाद में उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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