बच्चों को अपराधी बनाता है गर्भावस्था में धूम्रपान
'हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' के शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसी माताओं के बच्चों के बड़े होने के दौरान उनके बार-बार अपराध करने का खतरा रहता है।
'जर्नल ऑफ इपिडिमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ' के मुताबिक इस अध्ययन में बच्चों को अपराध के रास्ते पर अग्रसर करने वाले मानसिक अस्वस्थता और अभाव की स्थिति जैसे कारकों पर ध्यान दिया गया।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक इन कारकों के बाद तीसरा कारक बच्चों के माता-पिता का अत्यधिक धूम्रपान करना है। ऐसे अभिभावकों के बच्चों के वयस्क होने के साथ से अपराधों के चलते उनके गिरफ्तार होने का खतरा बढ़ जाता है।
इससे स्पष्ट होता है कि गर्भ के सिगरेट के धुएं के सम्पर्क में आने से उसमें विकसित होने वाले शिशु का मस्तिष्क प्रभावित हो सकता है। धूम्रपान बच्चों के व्यवहार और आवेगों व ध्यान को नियंत्रित करने वाले रासायनिक संकेतों का संचरण प्रभावित होता है।
हार्वर्ड स्कूल की एंजेला पैरैडिस के नेतृत्व में 4,000 वयस्कों में यह अध्ययन किया गया था। इन वयस्कों के 33 से 40 साल के होने तक उन पर नजर रखी गई थी।
अध्ययन में 1959 से 1966 के दौरान मां बनने वाली महिलाओं को सूचीबद्ध किया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान उनकी धूम्रपान संबंधी आदतों की जानकारी इकट्ठी की गई। अत्यधिक धूम्रपान करने वाली महिलाओं की श्रेणी में प्रतिदिन 20 या इससे अधिक सिगरेट पीने वाली महिलाओं को रखा गया।
जब 1999-2000 के दौरान इन माताओं की इस गर्भावस्था से होने वाले बच्चे 33 वर्ष की आयु तक पहुंचे तो शोधकर्ताओं ने उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि का पता लगाया।
अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान अधिक धूम्रपान करने वाली माताओं के बच्चे वयस्क होने के दौरान आपराधिक गतिविधियों में ज्यादा लिप्त पाए गए।
ऐसे युवाओं की गिरफ्तारी का खतरा 30 प्रतिशत तक बढ़ गया था और पुरुषों के साथ महिलाओं में भी यही स्थिति थी। वैसे आंकड़ों के मुताबिक महिलाएं आपराधिक गतिविधियों में कम ही लिप्त होती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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