अयोध्या फैसले को जेयूएच ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
नई दिल्ली। 90 वर्ष पुराने संगठन जमायत उलमा-ए-हिंद (जेयूएच) ने 30 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। संगठन की ओर से सोमवार को मोहम्मद सिद्दीक उर्फ हाफिज मोहम्मद सिद्दीक ने शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की। सिद्दीकी संगठन के महासचिव हैं। जेयूएच की अपील में सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान आकृष्ट करने के लिए कानून एवं तथ्यों से सम्बंधित 33 सवाल उठाए गए हैं।

उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अयोध्या की रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद वाले 90 फुट चौड़े और 120 फुट लंबे भूखंड को तीन हिस्सों में बांटने के आदेश दिए थे। इनमें से एक हिस्सा रामलला के पुजारी, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने कहा गया था।
जेयूएच ने सवाल किया कि क्या उच्च न्यायालय ने वादियों को खुश करने से परे होकर फैसला सुनाया क्योंकि किसी भी वादी ने बंटवारे की याचना नहीं की थी। अपील में यह भी पूछा गया कि क्या उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट का सहारा लिया, जिसका कि कोई तथ्यात्मक महत्व नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय का फैसला कहता है कि गिराया गया ढांचा मस्जिद थी या नहीं इस पर संशय है। ऐसा इसलिए क्योंकि ढांचे के एक हिस्से में हिंदुओं द्वारा प्रार्थना की जाती रही लेकिन इससे मालिकाना हक नहीं बदल जाता। याचिका में कहा गया कि उच्च न्यायलय ने आस्था और विश्वास के आधार पर फैसला सुनाकर गंभीर भूल की है।












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